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एएसआई के क्षेत्रीय निदेशक रहे केके मोहम्मद ने सबसे पहले विवादित ढांचे के नीचे मंदिर का दावा किया था। आज फैसले का आधार एएसआई की रिपोर्ट ही बनी।

News - एएसअाई रिपोर्ट फैसले का आधार बनी; विवादित ढांचे की दीवारों पर मंदिर के 14 स्तंभ थे, खुदाई में मिले 263 अवशेषों ने...

Nov 10, 2019, 07:40 AM IST
एएसअाई रिपोर्ट फैसले का आधार बनी; विवादित ढांचे की दीवारों पर मंदिर के 14 स्तंभ थे, खुदाई में मिले 263 अवशेषों ने अयोध्या में मंदिर की पुष्टि की


एएसआई के क्षेत्रीय निदेशक रहे केके मोहम्मद ने सबसे पहले विवादित ढांचे के नीचे मंदिर का दावा किया था। आज फैसले का आधार एएसआई की रिपोर्ट ही बनी।

अयोध्या में राम मंदिर की मौजूदगी का पुरातात्विक और ऐतिहासिक साक्ष्य 1976 में ही मिल गया था। तब मैं वहां अध्ययन के लिए पहुंची पुरातत्व विभाग की 10 सदस्यीय टीम का हिस्सा था। हमने विवादित ढांचे की दीवारों में मंदिर के 14 स्तंभ देखे थे। स्तंभ के निचले भाग में 11वीं-12वीं सदी के मंदिरों में दिखने वाले पूर्ण कलश बने थे। मंदिर वास्तुकला में पूर्ण कलश आठ एेश्वर्य चिह्नों में से एक है। ऐसे ही स्तंभ विवादित ढांचे और उसके आसपास खुदाई में भी मिले थे। इन साक्ष्यों के आधार पर 1990 में मैंने कहा था कि विवादित ढांचे के नीचे मंदिर था। इस वजह से कुछ लोग खफा हो गए और मुझे धमकियां भी दी गईं। इसके बाद 2003 में इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर वहां खुदाई की गई। खुदाई में तकरीबन 50 स्तंभों के नीचे ईंट से बना चबूतरा मिला। मंदिर के ऊपर कमल का फूल का चिह्न और अभिषेक जल बाहर निकालने वाली मकल प्रणाली का अवशेष भी मिला। विवादित ढांचे के आगे के भाग को समतल करते हुए मंदिर से जुड़े 263 अवशेष मिले थे। इन सबूतों से पुरातत्व विभाग इस निष्कर्ष पर पहुंचा था कि ढांचे के नीचे एक मंदिर था। इस रिपोर्ट को हाई कोर्ट को सौंपा गया था। खुदाई को निष्पक्ष रखने के लिए कुल 137 श्रमिकों में 52 मुस्लिम शामिल किए गए थे। बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के प्रतिनिधियों के अलावा हाई कोर्ट के एक मजिस्ट्रेट भी टीम के साथ हमेशा बने रहे।

- जैसा अनिल पटैरिया को बताया

ढांचे के खंडहर से विष्णु हरिशिला पटल मिला। इसमें 11वीं-12वीं सदी की नागरी लिपि में संस्कृत भाषा में लिखा है कि यह मंदिर रावण को मारने वाले भगवान को समर्पित है। यह शिलालेख 48x22 इंच का है।

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