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Food History : जलेबी का इतिहास भी इसकी तरह गोल है, जैसी जगह-वैसा नाम

भारतीयों को जलेबी से इस क़दर प्यार है कि कई लोग तो इसे राष्ट्रीय मिठाई तक कहते हैं।

Dainik Bhaskar

May 30, 2018, 03:27 PM IST
भारत में जलेबी का इतिहास 500 साल पुराना है। भारत में जलेबी का इतिहास 500 साल पुराना है।

यूटिलिटी डेस्क. लाल-नारंगी, चाशनी में डूबी गर्म-गर्म जलेबियां भारत के हर कोने में बड़े चाव से खाई जाती हैं। छोटे हो या बड़े जलेबी हर आयुवर्ग की पसंदीदा मिठाई है। भारतीयों को जलेबी से इस क़दर प्यार है कि कई लोग तो इसे अनाधिकृत रूप से राष्ट्रीय मिठाई तक कहते हैं। ख़ुशी का मतलब भी जलेबी है। ...तो चलिए शंख देसाई के साथ चलते हैं, जलेबी के गोल-गोल सफ़र पर।


जलेबी की शुरुआत
हौब्सन-जौब्सन के अनुसार जलेबी शब्द अरेबिक शब्द 'जलाबिया' या फारसी शब्द 'जलिबिया' से आया है। मध्यकालीन पुस्तक 'किताब-अल-तबीक़' में 'जलाबिया' नामक मिठाई का उल्लेख मिलता है जिसका उद्भव पश्चिम एशिया में हुआ था। ईरान में यह 'जुलाबिया या जुलुबिया' के नाम से मिलती है। 10वीं शताब्दी की अरेबिक पाक कला पुस्तक में 'जुलुबिया' बनाने की कई रेसिपीज़ का उल्लेख मिलता है। 17 वीं शताब्दी की 'भोजनकुटुहला' नामक किताब और संस्कृत पुस्तक 'गुण्यगुणबोधिनी' में जलेबी के बारे में लिखा गया है।


जलेबी के प्रकार

  • जलेबा : खानपान के लिए प्रसिद्ध इंदौर शहर में 300 ग्राम वज़नी 'जलेबा' मिलता है। जलेबी के मिश्रण में कद्दूकस किया पनीर डालकर पनीर जलेबी तैयार की जाती है।
  • चनार जिल्पी : बंगाल में 'चनार जिल्पी' नामक यह मिठाई स्वाद में बंगाली गुलाब जामुन 'पंटुआ' के जैसी होती है। दूध और मावा को मिलाकर जलेबी के मिश्रण में डालकर मावा जलेबी तैयार की जाती है।


भारत में जलेबी
जलेबी पर्शियन जुबान वाले तुर्की आक्रमणकारियों के साथ भारत पहुंची। यह कह सकते हैं कि भारत में जलेबी का इतिहास 500 साल पुराना है। पांच सदियों के दौरान इसमें कई बदलाव और स्थानीय परिवर्तन हुए है लेकिन जो बात सर्वव्यापी रूप से हुई वह ये कि जलेबी उत्सव का पर्याय बन गई। कहीं पोहे, तो कहीं रबड़ी के साथ जलेबी खाई जाती है।

विदेशों में जलेबी
लेबनान में 'जेलाबिया' नामक एक पेस्ट्री मिलती है जो आकार में लंबी होती है। ईरान में जुलुबिया, ट्यूनीशिया में ज'लाबिया, और अरब में जलाबिया के नाम से जलेबी मिलती है। अफ़ग़ानिस्तान में पारम्परिक तौर पर जलेबी मछली के साथ सर्व की जाती है। मध्यपूर्व में खाई जाने वाली जलेबी हमारी जलेबी से पतली, कुरकुरी और कम मीठी होती है। श्रीलंका की 'पानी वलालु' मिठाई जलेबी का ही एक प्रकार है जो उड़द और चावल के आटे से बनाया जाता है। नेपाल में मिलने वाली "जेरी' भी जलेबी का ही एक रूप है।

अफ़ग़ानिस्तान में पारम्परिक तौर पर जलेबी मछली के साथ सर्व की जाती है। अफ़ग़ानिस्तान में पारम्परिक तौर पर जलेबी मछली के साथ सर्व की जाती है।
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भारत में जलेबी का इतिहास 500 साल पुराना है।भारत में जलेबी का इतिहास 500 साल पुराना है।
अफ़ग़ानिस्तान में पारम्परिक तौर पर जलेबी मछली के साथ सर्व की जाती है।अफ़ग़ानिस्तान में पारम्परिक तौर पर जलेबी मछली के साथ सर्व की जाती है।
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