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महाभारत 2019: सर्जिकल स्ट्राइक की तैयारी में सेंधमार सुशासन बाबू- कुमार विश्वास की व्यंग्यात्मक श्रृंखला

महाभारत 2019 के तहत ख्यात कवि कुमार विश्वास के 52 व्यंग्यों की सालभर चलने वाली श्रृंखला।

Dainik Bhaskar

Jul 02, 2018, 08:44 AM IST
ख्यात कवि कुमार विश्वास। ख्यात कवि कुमार विश्वास।

हाजी आज बड़ी मौज में थे। परचून की दुकान वाले लालाजी और उनकी दुकान से छिटपुट खरीदारी कर रहा मैं, हम दोनों उनके निशाने पर थे। बोले, "और भई महाकवि! सबूत खरीद रहे हो क्या?" मैंने पूछा, "काहे का सबूत?" हाजी बोले, "तुम्हारे अनुपम-निरूपम दोस्तों ने जो मांगे थे, वही सबूत, अरे सर्जिकल स्ट्राइक के। तुम्हारे ‘सब बेईमान है जी’ वाले पाक-साफ ने तो पाक के बोलने से भी पहले इसे फर्जीकल बता दिया था। पाकिस्तान को लगा कि जब इनका सबसे बड़ा फर्जीकल भी इसे फर्जी बता रहा है, तो सुर में सुर मिलाने में क्या हर्ज?" मैंने कहा, "लेकिन हमने तो अपना स्टैंड अलग रखा हाजी।" हाजी बोले, "तो इसी गोलीबारी में तुम निपट भी तो गए, महाकवि! अब टंगे रहो स्टैंड पर!"

फिर लालाजी की तरफ देख कर बोले, "यार लाला तुम तो मोटे व्यापारी हो, गुप्तदान के अलावा इनके फर्जीकल से खरीफ-फरोख्त भी होती ही होगी! उसे बोलो कि छोटे-बड़े भाइयों-दोस्तों की हत्याएं करने की बजाय, प्रायश्चित के लिए कुछ दिन सीमा पर जाकर शत्रुओं पर गोली चलाएं।" लालाजी ने भी मौका पकड़ा, "बोल दूंगा हाजी पर उनके बदलते बयानों को देखकर तो पता ही नहीं चलता कि कब बंदूक का मुंह सामने की तरफ करेंगे और कब अपनी तरफ।"

हाजी तपाक से बोले, "अमां वो बंदा तो किधर भी मुंह करके गोली चलाए, आखिर में भला तो देश का ही होगा।" मैंने बात की दिशा बदलने की कोशिश की, "वो तो ठीक है लेकिन, ये भाजपा के छुटभैये से लेकर प्रवक्ता तक सब ऐसे ताल ठोंक रहे थे जैसे तोप में गोले की जगह ये ही दागे गए हों। इन पर न लाला कुछ कह रहे है न तुम हाजी।" हाजी से पहले खींसें निपोरते लाला बोले, "भाई जी इसे राजनीति में मौके पर चौका लगाना कहते हैं, बोले तो मोटा-भाई की टाइमिंग।" मैंने कहा, "मौके पर चौके लगाना अगर पुराने वक़्तों में भी होता न लाला तो आज इंदिरा गांधी के खानदानी ढाका में राज कर रहे होते और शास्त्री जी के पड़पोते बलूचिस्तान के राष्ट्राध्यक्ष होते!"

हाजी बोले, "गांधी खानदान की तो बोलो ही मत। जब से सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो आया है, बेचारे कांग्रेसी टीवी तक नहीं देख रहे। उन्हें ऐसा लगता है जैसे रॉकेट टीवी से निकलकर उनके सीने में न धंस जाए। हर चैनल पर वीडियो भी तो उसका ही चल रहा है।" लालाजी ने एक कच्चा-सा जुमला मारा, "लेकिन पोगो पर तो समाचार आता ही नहीं।"

मैंने कहा, "अब बात पोगो वाली नहीं रही। अब तो युवराज सड़क पर उतर गए हैं। सुना है महागठबंधन की ज़बर्दस्त तैयारी है।" हाजी बोले, "तैयारी तो है भाई। खबर तो यह भी है कि चक्रवर्ती सेंधमार सुशासन बाबू भी भाजपा पर सर्जिकल स्ट्राइक की तैयारी में हैं। यही हिसाब-किताब चला तो गणित गड़बड़ हो जाएगा मोटा भाई का।’" लालाजी बोले, "यार हाजी भाई, आप तो बुद्धिजीवियों जैसी बातें करने लगे। एक औरत नौ महीनों में बच्चा जनती है, तो इसका मतलब ये थोड़ी है कि नौ औरतें मिलकर एक महीने में बच्चा जन देंगीं।" मुझे हंसी आ गई। मैंने कहा, "क्या पता, 2019 तक ऐसा भी कोई फास्ट-फारवर्ड टेस्ट-ट्यूब बेबी का फॉर्मूला बन जाए! आखिर पुंसवन-संस्कार भी तो तकनीक के शहर बेंगलुरू में हुआ है।" हाजी ने मुस्कान बिखेरी, "महाकवि! बात तो तुम कभी-कभी दूर की कहते हो, लेकिन ये सियासत देसी कट्‌टे की तरह है। इसमें कह पाना बड़ा मुश्किल है कि कब गोलियां चलते-चलते कट्‌टा हाथ में ही फट जाए।"
न जाने कौन रोएगा न जाने कौन हँस जाए?
न जाने कौन चल निकले, न जाने कौन फंस जाए?
ये मिसगाइड मिसाइल हैं, सियासत की लड़ाई की
न जाने किसको बख्शें और न जाने किसमें धंस जाए?

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ख्यात कवि कुमार विश्वास।ख्यात कवि कुमार विश्वास।
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