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डाउनलोड करेंरांची. कुरमी जाति को एसटी सूची में शामिल करने को लेकर 23 अप्रैल को झारखंड बंद की घोषणा की गई है। कार्यक्रम की सफलता को लेकर कुरमी विकास मोर्चा की बैठक बुधवार को होटल गंगा आश्रम में शीतल ओहदार की अध्यक्षता में हुई। कहा गया कि लाखों की संख्या में महिला एवं पुरुष ढोल, नगाड़ा और पारंपरिक हथियार के साथ सड़क पर उतरेंगे और बंद को सफल बनाएंगे। बंद की पूर्व संध्या पर 22 अप्रैल को सभी जिला मुख्यालयों में मशाल जुलूस निकाला जाएगा।
बैठक में शीतल ओहदार ने कहा कि सरकार संवैधानिक अधिकार नहीं देकर समाज को तोड़ने का काम कर रही है। कुरमी-कुड़मी (महतो जाति) को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने के लिए राज्य सरकार कैबिनेट में चर्चा कर अविलंब भारत सरकार को अनुशंसा भेजे। ओहदार ने कहा कि कुरमी महाजुटान के जितने भी नेता हैं, 23 अप्रैल के बंद में रोड पर उतरें और अधिक से अधिक गिरफ्तारी देकर कुरमी एकता का परिचय दें। बैठक में केंद्रीय सचिव रामपदो महतो, सखीचंद महतो, रूपलाल महतो, सागर महतो, झबुलाल महतो, राजकुमार आदि उपस्थित थे।
अगर कुरमी-तेली आदिवासी बने, तो मूल आदिवासी खत्म हो जाएंगे : धान
कुरमी एवं तेली जाति को आदिवासी बनाए जाने की मांग के विरोध में 26 अप्रैल को रांची के मोरहाबादी मैदान में 32 आदिवासी जाति बचाओ महारैली का आयोजन किया है। महारैली को 49 से अधिक आदिवासी संगठनों ने समर्थन दिया है। कार्यक्रम को लेकर बुधवार को इन आदिवासी संगठनों की बैठक पूर्व मंत्री देवकुमार धान की अध्यक्षता में आदिवासी सरना महासभा कार्यालय, चडरी में हुई। बैठक में सभी 32 आदिवासी जनजाति समुदाय के प्रतिनिधि शामिल हुए। देवकुमार धान ने कहा कि अगर उपरोक्त दोनों जातियां आदिवासी में शामिल हो गईं, तो मूल आदिवासी ही समाप्त हो जाएंगे।
उन्होंने कहा कि 32 आदिवासी जातियों के लोगों की जमीन सीएनटी कानून के अंतर्गत ठग फुसलाकर, दारू पिलाकर, डरा धमकाकर, कर्ज में दबाकर औने-पौने दाम पर खरीद लेंगे। जनजातियों के लिए आरक्षित सरकारी नौकरी और अन्य स्थानों को निगल जाएंगे। पंचायत समिति, जिला परिषद तथा शहरी निकायों में आरक्षित पदों और स्थानों पर कब्जा जमा लेंगे। बैठक में 24 एवं 25 अप्रैल को मशाल जुलूस निकालने का निर्देश दिया गया। मौके पर वीरेंद्र भगत, अमित मुंडा, नारायण उरांव, बुधु उरांव, विकास मिंज, कैलाश उरांव, विनोद उरांव, अभयभुट कुंवर सहित कई लोग थे।
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