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कौशल तो है पर दूरदर्शिता की कमी से हम मात खा जाते हैं

भारत की बात करें, तो यहां बुद्धिमत्ता और कौशल के होते हुए भी व्यापक दृष्टि का अभाव दिखता है।

राजेन्द्र जांगिड़ | Last Modified - Apr 26, 2018, 12:25 AM IST

कौशल तो है पर दूरदर्शिता की कमी से हम मात खा जाते हैं
द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश युद्ध की तबाही से जूझकर बाहर निकले और 80-90 के दशकों में विश्व की विकसित अर्थव्यवस्थाओं के समकक्ष आकर खड़े हो गए। इनकी कंपनियां आज विश्व की सबसे ताकतवर कंपनियां बन गईं है। इनकी सफलता का राज बने इनके कॉर्पोरेट कर्मचारी आज भी उतने ही जुझारू, सजग और दृढ़ संकल्प के धनी हैं। दूसरी ओर, भारत की बात करें, तो यहां बुद्धिमत्ता और कौशल के होते हुए भी व्यापक दृष्टि का अभाव दिखता है, जिससे दूरदर्शी योजनाएं साकार नहीं होतीं।
आज विश्व बाजार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जीनोमिक्स, रोबोटिक्स और सेंसर्स इतनी तेजी से आ रहे हैं, जो कई रोजगारों और व्यवसायों के लिए घातक सिद्ध होंगे। अमेरिकी कंपनी एमेजॉन ने ऑन-लाइन बुकस्टोर के रूप में शुरुआत की थी परंतु नई टेक्नोलॉजी और कार्यकुशलता के दम पर आज उसने भारत के ऑनलाइन बाजार में अपना सिक्का जमा लिया है। अब वह देश में क्लाउड सेवाओं की बड़ी दावेदार कंपनी है। इसी प्रकार टैक्सी उद्योग में उबर ने, मनोरंजन उद्योग में एपल और नेटफ्लिक्स ने, टेस्ला ने इलेक्ट्रिक कार के क्षेत्र में धूम मचा रखी है। इसका प्रभाव भारत के इन्फो टेक्नोलॉजी क्षेत्र में होने वाली छंटनी के रूप में देखा जा सकता है।
हमारे कॉर्पोरेट भी पुराने तरीके से ही काम कर रहे हैं। हर कंपनी में मार्केटिंग, सेल्स, कस्टमर-सपोर्ट के अलग-अलग विभाग हैं और इन विभागों में ही आपसी प्रतियोगिता चलती रहती है। कॉर्पोरेट कंपनी अपने कर्मचारियों को विभागों से ऊपर उठकर अन्य कंपनियों से होड़ की परिकल्पना नहीं दे पाती। आधुनिक टेक्नोलॉजी से एक ओर खतरे बढ़ रहे हैं, तो दूसरी ओर अवसर भी बढ़ रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से मनुष्य की निर्णय क्षमता बढ़ रही है। स्मार्ट सिटी और चिकित्सा से लेकर कृषि तक सेंसर्स का प्रयोग बढ़ा है। अगर भारतीय इन अवसरों का लाभ उठाए, तो हम विश्व के श्रेष्ठ व्यवसायियों में स्थान बना सकते हैं।
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