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अनाज फिल्टर प्लांट 13 साल से बना है शोपीस 17 लाख खर्च, लेकिन शुरू नहीं हुई ग्रेडिंग मशीन

3 वर्ष पहले
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आलमपुर मंडी में बिना उपयोग के कबाड़ हो रहा अनाज फिल्टर प्लांट।

आंशिक दर पर मिलता लाभ

मंडी में लगाए गए प्लांट में ग्रेडिंग मशीन से किसानों के अनाज को साफ किया जाना था। इसके लिए किसानों से मंडी प्रशासन द्वारा 5 रुपए प्रति क्विंटल आंशिक दर का चार्ज देना होता था। मालूम हो कि लेवी पर सरकारी खरीद के दौरान किसानों के अनाज में मिट्टी, फसल के डंठल आदि होने के कारण अनाज वापस लौटा दिया जाता है। इस स्थिति से उबरने के लिए किसानों को यह सुविधा प्रदान की जानी थी। लेकिन योजना का लाभ किसानों तक नहीं पहुंच सका, जबकि शासन का खर्च भी पूरा हो चुका है। ऐसे में किसानों की शिकायत है कि सरकार योजनाएं प्रारंभ लाभ प्रदान करने का प्रयास तो करती है, लेकिन विभागीय अधिकारी उन योजनाओं को धरातल पर उतारने में सक्षम नहीं हैं।

ऐसे कार्य करती है मशीन

ग्रेडिंग मशीन में सरसों और गेहूं के साथ अन्य दलहनीय अनाज भी साफ किए जा सकते हैं। इसमें तीन द्वार होते हैं, जिनमें एक से धूल, दूसरे से डंठल और तीसरे से क्लीन अनाज प्राप्त होता है। वहीं एक अतिरिक्त द्वार से अनाज डाला जाता है। अनाज साफ होते ही किसानों की उपज पर प्रति क्विंटल 100 रुपए तक की वृद्धि होती है। गौरतलब है कि खेतों में लगे थ्रेसर से अनाज में मिट्टी, कंकड़ के अलावा फसल का कचरा चला जाता है, जिसे मंडी में मंदे भाव में बोली पर खरीदते हैं। किसानों की इस समस्या के लिए शासन की ओर से योजना शुरू की गई थी। लेकिन सालों के बाद भी इस योजना का धरातल पर किसानों को लाभ प्राप्त नहीं हुआ है।

मंडी में नहीं बनाए गोदाम

गल्लामंडी में गोदाम नहीं बनने के कारण हमने प्लांट मंडी प्रशासन को हैंडओवर नहीं किया है। हम अधिकारियों से इस संबंध में चर्चा करेंगे। -एनपी बाथम, कार्यपालन यंत्री, राजघाट परियोजना दतिया

मशीन के अंदर लगी बॉल गायब शेड की शीट भी ले गए लोग

दतिया की राजघाट परियोजना द्वारा मंडी में जगह चिन्हित कर ग्रेडिंग मशीन लगाकर कमरे के ऊपर टीनशेड लगाया गया था। सुरक्षा व्यवस्था के अभाव में असमाजिक तत्वों द्वारा प्लांट के ऊपर लगे टीनशेड के चद्दर गायब कर दी है। इतना ही नहीं मशीन में लाखों रुपए की चाइनीज बॉल व अन्य पार्ट्स गायब कर दिए गए हैं। जबकि प्लांट में लगे अन्य पुर्जे भी धीरे-धीरे देखरेख के अभाव में नष्ट होते जा रहे हैं। हालांकि दोनों विभाग आपस में बातचीत कर योजना को क्रियान्वित करने का प्रयास करें तो यह योजना शीघ्र ही चालू कराई जा सकती है। मगर अधिकारियों की बेरुखी योजना को ग्रहण लगाती दिख रही है।

साफ करके लाते हैं अनाज

खेतों में अनाज साफ करके मंडी में लाते हैं या फिर घर पर ही पंखा लगाकर अनाज फटकते हैं। क्योंकि मंडी में लगा प्लांट चालू नहीं है। -मलखान कौरव, किसान, आलमपुर

प्लांट का नहीं मिला लाभ

गल्लामंडी में लगा प्लांट महज शोपीस बनकर रह गया है, जिसका लाभ किसानों को नहीं मिल सका है। शिकायत करने पर अधिकारी जिम्मेदारी तक लेने को तैयार नहीं हैं। -वीरू तिवारी, किसान, आलमपुर

मंडी प्रशासन के हैंडओवर नहीं किया गया प्लांट

मंडी में राजघाट परियोजना दतिया द्वारा प्लांट लगाया गया था, जिसे मंडी प्रशासन के हैंडओवर नहीं किया गया है। इस कारण हम प्लांट चालू करने में सक्षम नहीं हैं। -दौलतराम सिंह, सचिव, गल्लामंडी आलमपुर

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