धन-वैभव की प्राप्ति के बाद मनुष्य प्रभु को भूल जाता है - अवधेशाचार्यजी
भक्त और भगवान के बीच का संबंध अटूट है। भगवान की भक्ति से ही मनुष्य धन, वैभव और कीर्ति प्राप्त करता है। बाद में उन्हें ही भूल जाता है। आखिरी समय में जब वह बीमार होता है और कोई मदद के लिए नहीं मिलता तब वह ईश्वर को याद करता है। भागवत कथा में धर्म-अधर्म, पाप-पुण्य का अंतर समाया है। जिसने इसे समझ लिया, समझो मानव भव को पार कर दिया।
यह बात जगतगुरु अवधेशाचार्यजी महाराज ने भागवत कथा विश्राम पर कही। भारतीय पत्रकार संघ एवं गुरुभक्त महिला मंडल द्वारा आयोजित श्रीमद भागवत कथा के अंतिम दिन महाराज ने सुदामा और श्रीकृष्ण की मित्रता का बखान किया। किस तरह भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मित्र का दुख जान केवल चंद मुट्ठी चावल ग्रहण कर उसे सांसारिक सुखों से मालामाल कर दिया। भगवान अपने भक्त की एक आवाज पर दौड़े चले आते हैं। कथा विश्राम पर आरती व प्रसादी का लाभ मंडी अध्यक्ष प्रतिनिधि भंवरसिंह सोलंकी परिवार ने लिया। जगतगुरु के वंदन का लाभ संजीव जैन, दिलीप भार्गव, अनिल शुक्ला, राजेंद्रसिंह सिसौदिया, वीरेंद्रसिंह सोलंकी, विद्यानंद गोस्वामी, राजेश कोठारी, भूपेंद्रसिंह सोलंकी, मनोज चावला, राकेश चौहान, नागेश खारोल, गाेवर्धनसिंह सोलंकी, जुझारसिंह सोलंकी, रघुनाथसिंह सोलंकी, मनोहरलाल अरोड़ा आदि ने लिया। आयोजन समिति व अनादिकल्पेश्वर महादेव मंदिर जीर्णोद्धार समिति ने सम्मान किया। आरती के बाद हवन हुआ। इसके बाद जनसहयोग से भंडारा रखा गया, जिसमें भक्तों ने प्रसादी ग्रहण की। शैलेष आंचलिया, निजाम काजी, राजू गुप्ता, राजेंद्र पारीख ने व्यवस्था संभाली। अशोक देवड़ा, मंगलेश रांका, विनय निगम, राकेश चौहान, राजू शर्मा ने प्रशस्ति पत्र भेंट किया।
कथा दौरान जगतगुरु का सम्मान करते भक्त।