मानव भव को ऐसे ही बर्बाद मत करो, ईश्वर की भक्ति के लिए समय निकालें- आचार्य वशिष्ठ
चौरासी लाख योनियों में भटकने के बाद मिले इस मानव भव को बर्बाद मत करों। सद्कर्म और प्रभु भक्ति के लिए समय निकालें, क्योंकि यही हमारे जीवन को सही दिशा देगा और मोक्ष दिलाने में मदद करेगा। मनुष्य पूरा जीवन सांसारिक सुविधा जुटाने में गंवा देता है, वो ये भूल जाता है कि जब मौत आएगी तो साथ में केवल प्रभु भक्ति ही जाएगी।
यह बात आचार्य कृष्णकांत वशिष्ठ ने गांव मिट्ठनगढ़ में भागवत कथा में कही। उन्होंने प्रात:काल उठी के रघुनाथ, माता-पिता गुरू नावही माथा.. चाैपाई सुनाई। यदि हमें भारतीय संस्कृति और परंपरा को जीवित रखना है तो सभी को राम और श्रीकृष्ण के बताए आदर्शों पर चलने की जरूरत है। कथा के चौथे दिन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया, पांडाल में जयकारे लगे। हर कोई प्रभु भक्ति में झूमा। क्रांतिकारी हिंदू ब्रिगेडियर संत कैलाशचंद्र शास्त्री अनाड़ी के सान्निध्य में मुक्तेश्वर महादेव मंदिर विकास समिति द्वारा आयोजित कथा का विश्राम 15 अप्रैल को होगा। समिति अध्यक्ष बनेसिंह देवड़ा ने कथावाचक का सम्मान किया। आखरी दिन कथा के बाद भंडारा होगा। ओम बना, मदनसिंह सोलंकी, नरेंद्रसिंह देवड़ा, अखिलेश निगम, वरदीचंद पोरवाल, गोकुलसिंह देवड़ा, भुवानलाल पोरवाल, शवसिंह, मनोज गुप्ता ने भक्तों से धर्मलाभ लेने की अपील की है।
धर्म
गांव मिट्ठनगढ़ में चल रही श्रीमद भागवत कथा, विश्राम आज, भंडारा भी होगा
भागवत के दौरान मौजूद महिलाएं। इनसेट : कथा सुनाते आचार्य कृष्णकांत वशिष्ठ