पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • मेहुल चौकसी के कारण मार्च तिमाही में बैंकों का एनपीए 8,000 करोड़ रु. बढ़ेगा

मेहुल चौकसी के कारण मार्च तिमाही में बैंकों का एनपीए 8,000 करोड़ रु. बढ़ेगा

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
मेहुल चौकसी की कंपनी गीतांजलि जेम्स का कर्ज फंसने के कारण जनवरी-मार्च तिमाही में बैंकों का एनपीए कम से कम 8,000 करोड़ रुपए बढ़ने वाला है। गीतांजलि ने जनवरी से मार्च के दौरान कर्ज पर ना तो ब्याज दिया है, ना ही मूल राशि का कोई हिस्सा लौटाया है। एक तिमाही में ईएमआई नहीं मिलने पर बैंकों को वह कर्ज एनपीए घोषित करना पड़ता है। इसके एवज में उन्हें मुनाफे का एक हिस्सा अलग रखना होगा, जिसे प्रोविजनिंग कहते हैं। इससे बैंकों का मुनाफा भी घटने के आसार हैं।

गीतांजलि जेम्स का प्रमोटर मेहुल चौकसी हीरा कारोबारी नीरव मोदी का मामा है। दोनों ने फर्जी लेटर ऑफ अंटरटेकिंग (एलओयू) के जरिए पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) को 13,000 करोड़ रुपए का चूना लगाया है। दोनों जनवरी में ही देश छोड़कर जा चुके हैं। मुंबई की सीबीआई कोर्ट ने दोनों ने नाम गैर-जमानती वारंट जारी कर रखा है।

गीतांजलि को बैंकों ने 2010-11 में कर्ज देना शुरू किया था। इलाहाबाद बैंक की अगुवाई में 21 बैंकों के कंसोर्टियम ने कंपनी को वर्किंग कैपिटल लोन दिया था। 2014 में आईसीआईसीआई बैंक कंसोर्टियम का लीड बैंक बना। उस साल कंपनी दो महीने तक बैंकों को एक रुपया भी लौटाने में नाकाम रही थी। 2015 में इसके कर्ज की रिस्ट्रक्चरिंग भी की गई। एक बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दिसंबर 2017 तक कंपनी कर्ज की नियमित सर्विसिंग कर रही थी। लेकिन जनवरी से यह रुक गया है।

इंडस्ट्री को दिया गया 20% कर्ज एनपीए बन गया है

72% एनपीए इंडस्ट्री के कारण

सेक्टर एनपीए फीसदी में

इंडस्ट्री 6,09,222 20.41%

सर्विसेज 1,10,520 5.77%

कृषि 69,600 6.53%

पीएनबी की ऑडिटिंग करने वाले 8 सीए को पूछताछ का नोटिस

चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की शीर्ष बॉडी आईसीएआई ने पीएनबी के ब्रेडी हाउस ब्रांच की ऑडिटिंग करने वाले 8 ऑडिटरों को पूछताछ के लिए नोटिस भेजा है। इन्होंने 2011-12 से 2016-17 के दौरान ब्रांच की ऑडिटिंग की थी। इसी अवधि में 13,000 करोड़ रुपए के घोटाले को अंजाम दिया गया। आईसीएआई के एक मेंबर ने बताया कि अभी बोर्ड इनकी प्राथमिक जांच करेगा। अभी यह नहीं कह सकते कि उनकी गलती है या नहीं।

दिसंबर 2017 में बैंकिंग सेक्टर का ग्रॉस एनपीए 8,40,958 करोड़ रुपए पहुंच गया। इसमें सबसे ज्यादा 72 फीसदी हिस्सा इंडस्ट्री का ही था।

(आंकड़े करोड़ रुपए में)

24% एनपीए एसबीआई का

बैंक एनपीए फीसदी में

एसबीआई 2,01,560 23.96%

पीएनबी 55,200 6.56%

आईडीबीआई 44,542 5.29%

आईसीआईसीआई-वीडियोकॉन केस

दो साल पहले आरबीआई को नहीं मिला था सुबूत

आईसीआईसीआई बैंक द्वारा वीडियोकॉन ग्रुप को कर्ज देने की रिजर्व बैंक ने 2016 में जांच की थी, लेकिन तब ‘हितों के टकराव’ का कोई सुबूत नहीं मिला था। एक शिकायत मिलने के बाद पीएमओ ने यह मामला आरबीआई के पास जांच के लिए भेजा था। दस्तावेजों के मुताबिक आरबीआई ने रिपोर्ट में लिखा कि वीडियोकॉन ग्रुप को 2012 में आईसीआईसीआई बैंक ने 1,750 करोड़ का लोन दिया। यह एसबीआई के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम का हिस्सा था। इसमें हितों के टकराव की कोई बात साबित नहीं हुई। हालांकि इसने दीपक कोचर की कंपनी न्यूपावर रिन्युएबल्स में मॉरिशस से फंडिंग के स्रोत पर सवाल उठाए थे।

पी-नोट्स इन्वेस्टमेंट नौ साल के निचले स्तर पर

भारतीय इक्विटी,डेट और डेरिवेटिव मार्केट में पी-नोट्स (पार्टिसिपेटरी नोट) के जरिए आने वाला निवेश नौ साल के निचले स्तर आ गया है। मार्च में यह घटकर 1.06 लाख करोड़ रु. रह गया। जून 2009 में यह 97,885 करोड़ रु. था। अप्रैल 2017 से पूंजी बाजार नियामक सेबी द्वारा नियम सख्त किए जाने के बाद से इसमें गिरावट आई है।

क्या है पी-नोट्स

ऐसे विदेशी निवेशक जो सेबी में रजिस्ट्रेशन कराए बगैर भारतीय पूंजी बाजार में निवेश करना चाहते हैं वे इनका इस्तेमाल करते हैं।

उन्हें यह इन्स्ट्रूमेंट सेबी में रजिस्टर्ड फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (एफपीआई) जारी करते हैं।

जून 2017 से गिरावट आनी शुरू हुई

पी-नोट्स के निवेश में जून 2017 से गिरावट आनी शुरू हुई थी। सितंबर में यह आठ साल के निचले स्तर पर आ गया था। अक्टूबर में मामूली बढ़ा। लेकिन नवंबर में फिर गिरावट आई। फिर मार्च 2018 तक यही रुझान बना रहा। (स्रोत : सेबी)

बीते तीन माह में ऐसे घटा पी-नाेट्स निवेश

1,19,000

1,06,760

जनवरी 2018

फरवरी

2018

मार्च में पी-नोट्स से आया निवेश

73,264

करोड़ रु. - इक्विटी में।

राशि (करोड़ रु. में)

1,06,403

मार्च

2018

33,139 करोड़ रु. डेट और डेरिवेटिव में।

खबरें और भी हैं...