आनी का दिल कहे जाने वाले और कभी आनी की शान और पहचान रहे ऐतिहासिक राजा रघुवीर सिंह के नाम से स्थापित स्टेडियम आज गंदगी के ढेर में है। जल जंगल जमीन और शिक्षा एनजीओ के संरक्षक चमन शर्मा का कहना है कि पुरातात्विक महत्व की इन धरोहरों के सुंदरीकरण और स्वच्छता को लेकर प्रशासन कितना संजीदा है, इसका अंदाजा यहां की हालात देखकर लगाया जा सकता है। यहां बने ब्रों पुराने स्टेडियम में हर कोई घुमंतु डेरा डाले बैठा रहता है तो कभी इस मैदान में दुकानें सजी रहती हैं। मैदान में चारों ओर गाड़ियां पार्क रहती हैं, जो बच्चों के खेलने में खलल डालती है। जो व्यक्ति मैदान या स्टेडियम में दुकानें डालते हैं वे वहां गंदगी फैला कर रफूचक्कर हो जाते हैं। मेले के दौरान जहां देवताओं के बैठने का स्थान रहता है वहां जूते- चप्पल की सेल की दुकान लगाने वाले ने बचे हुए जूते वहीं जला दिए हैं। जबकि पंचायत या प्रशासन कोई कार्यवाही नहीं करता है। मैदान के आसपास गंदगी, कचरे के ढेर ,बदबूदार नालियां नाक पर रुमाल रखकर लौट चलने को मजबूर कर देते हैं। हालांकि मैदान और स्टेडियम के अस्तित्व बचाने के लिए समय-समय पर विभिन्न संगठन पहल भी करते रहते हैं लेकिन धीरे धीरे अस्तित्व ही मिटता जा रहा है। इन प्राचीन धरोहरों का अस्तित्व सरकार एवं प्रशासन चाहे जितना स्वच्छता को लेकर फरमान जारी करे लेकिन विभाग इसके प्रति गंभीर नहीं है। राजा रघुवीर सिंह स्टेडियम में जाम नालियां मच्छरों का प्रकोप, सड़कों पर गंदगी का अंबार स्वच्छता पर सवालिया निशान खड़ा करने के लिए पर्याप्त है। गंदगी से कराह रहा यह मैदान स्वच्छता अभियान की पोल खोलने के लिए काफी हैं।