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100 मेगावॉट की ऊहल चरण तीन पावर प्रोजेक्ट के पेन स्टाक में दरारें

3 वर्ष पहले
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जोगेंद्रनगर में निमार्णधीन 100 मेगावॉट की ऊहल चरण तीन पन बिजली परियोजना के शुरू होने पर खतरा मंडरा गया है। परियोजना के पेन स्टाक में दरारें आ गई हैं। यह दरारें पानी भराव के समय देखी गई हैं। जिसके चलते अब इस परियोजना के मई माह में शुरू होने पर संशय पैदा हो गया है।

इस पावर प्रोजैक्ट को मई माह में शुरू किया जाना प्रस्तावित है। लेकिन पेन स्टाक में दरारें उभरने से जहां इसकी गुणवत्ता पर सवालिया निशान खड़े हो गए है। वहीं अब इस प्रोजेक्ट के शुरू होने पर भी खतरा मंडरा रहा है। परियोजना के पेन स्टॉक के कार्य में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया है। जिस कारण अब टेस्टिंग के समय यह समस्या पेश आनी शुरू हो गई है। इस परियोजना के पेन स्टॉक के नीचे लगाए गए लकड़ी के स्लीपर ही गुणवत्ता की पोल खोल रहे हैं। पेन स्टॉक में पानी भरते समय दरारें देखी गई हैं।

गौरतलब है कि ऊहल चरण तीन परियोजना का कार्य वर्ष 2004 में शुरू किया गया था। परियोजना का कार्य 2008 में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। कार्य शुरू होने के समय इस परियोजना के निर्माण पर 432 करोड़ रुपए खर्च आने की बात कही गई थी, लेकिन अब इस परियोजना में करीब 1500 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए जा चुके है लेकिन अभी भी इस परियोजना को समर्पित नहीं किया जा सका है।

जल्दबाजी पड़ सकती है लोगों पर भारी| तुलाह पंचायत के पूर्व प्रधान रणजीत चौहान ने बताया कि बीवीपीसीएल अपनी खामियों को छुपाकर इस परियोजना का जैसे तैसे उद्घाटन करवाना चाहती है, लेकिन उनकी यह जल्दबाजी स्थानीय गांव गुलाणा, सनहाली तथा रक्तल के लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। उनका कहना है कि पेन स्टाक को लकड़ी के स्लीपरों के सहारे खड़ा रखना जोखिम भरा दिखाई पड़ता है। तीनों गांवों पर यह परियोजना भारी पड़ सकती है। पेन स्टाक में पूरे प्रेशर से जब पानी डाला जाएगा तब कही से इसके फटने का अंदेशा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2009 से ही इस परियोजना के निर्माण कार्य पर सवाल उठा रहे है। उस दौरान इस परियोजना कि गुणवता की जांच सीबीआई व एंटी क्रप्शन विभाग से करवाने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि पेन स्टाक में पड़ी हुई दरारों को हल्के में नहीं लिया जा सकता है।

परियोजना में अाई दरारें।

परियोजना के अधिशाषी अभियंता राजीव शर्मा ने कहा कि परियोजना की टेस्टिंग का कार्य चल रहा है। कोई भी कमी सामने आती है तो उसे ठीक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि टेस्टिंग के दौरान एक पीलर में दरारें देखी गई है। उन्हे ठीक किया जा रहा है। सभी कमियों को दूर करने के पश्चात ही इस परियोजना का शुभारंभ किया जाएगा।

रिसाव रोकने के लिए मंगवाया केमिकल| इनमें से हो रहे रिसाव को रोकने के लिए विभाग ने विशेष तौर से विदेश से केमिकल मंगवाया है। उस केमिकल को अब प्रयोग में लाया जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि इस केमिकल से हो रही लिकेज को ठीक करने में विभाग को कामयाबी मिल पाएगी। लेकिन लिकेज बंद नहीं हुई तो इस परियोजना के शुरू होने में और भी देरी हो सकती है। जाहिर है कि मच्छयाल से चुल्हा तक लगभग आठ किमी की टनल बनाई गई है। चुल्हा से ऊपर रक्तल साईट के पास विभाग को लिकेज को दूर करने के लिए परेशानी पेश आ रही है।

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