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- आसींद| आचार्य महाश्रमण के आज्ञानुवर्ती मुनि सुरेशकुमार हरनावा के सानिध्य
आसींद| आचार्य महाश्रमण के आज्ञानुवर्ती मुनि सुरेशकुमार हरनावा के सानिध्य
आसींद| आचार्य महाश्रमण के आज्ञानुवर्ती मुनि सुरेशकुमार हरनावा के सानिध्य में वर्षीतप तपस्वी कन्हैयालाल दुगड़ के छठे वर्षीतप समापन पर तेरापंथ भवन में 117 जोड़ों ने एक थीम व एक धुन के साथ स्वस्तिक की आकृति पर भक्तांबर महायज्ञ अनुष्ठान किया।
नमस्कार महामंत्र व पारिवारीक अभिनन्दन गीत से शुरू हुए कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शासन मुनि सुरेशकुमार हरनावा ने कहा कि भक्तांबर दिव्य चमत्कारी स्तोत्र है। इसकी साधना करने वालों के जीवन में रोज अंतहीन चमत्कार होते हैं। उन्होंने कहा कि भक्तांबर के 48 पद्य आचार्य मानतुंग द्वारा जैन संस्कृति की रक्षा निमित्त रचे थे। उनमें से 4 पद्य निकाल दिए गए, जो नियमित भक्तांबर का मन से ध्यान करता है उसके समस्त कष्ट दूर हो जाते हैं।
कार्यक्रम में सात वर्ष मुनिद्वय का तेरापन्थ भवन पदार्पण पर तेरापन्थ समाज ने भावभीना स्वागत किया। सुशीला छाजेड़ ने गीत प्रस्तुत कर वर्धापन किया। इस मौके तेरापन्थ सभा द्वारा सृजित तपस्वी अभिनन्दन पत्र का वाचन कार्यकारी अध्यक्ष कन्हैयालाल कांठेड़, सभा अध्यक्ष भंवरलाल चौरड़िया, मंत्री अनिल गोखरू सहित सभा के कार्यकर्ताओ ने अभिनन्दन पत्र भेंट किया। वहीं महेंद्रसिंह छाजेड़ ने भी स्मृति चिन्ह भेंट किया। आभार प्रेमलता बाफना ने किया। मंच संचालन मुनि सम्बोधकुमार ने किया। वर्षीतप तपस्वी कन्हैयालाल दुग्गड़ ने छठी वर्षीतप के उपलक्ष्य में आजीवन श्रवण-भाद्रपद ब्रह्मचर्य की साधना व हरियाली का त्याग रखने का संकल्प किया। मूल मुनि मसा और शासन मुनि हरनावा 16 अप्रैल को सुबह 9 बजे ‘जिएं तो जिएं कैसे’ विषय पर प्रवचन देंगे।