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डर : दो साल बाद फिर से क्षेत्र में पैंथर का हमला

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | गणेशपुर/डूंगरपुर

आसपुर पंचायत समिति की गणेशपुर ग्राम पंचायत के ढेकुआ फला में बीती रात मादा पैंथर ने शावकों के साथ आंगन में सोए युवक पर हमला कर दिया। जाग होने से कुनबा जंगल में भाग गया, लेकिन इंसानों पर हमले की घटना दो साल बाद फिर से शुरू होने से वन विभाग की नींद उड़ गई है।

शुक्रवार रात दो बजे हालिया पुत्र कचरा(50) अपने परिवार के साथ घर के बाहर आंगन में सोया था। एक मादा पैंथर ने हालिया के दोनों पैर जबड़ों में दबोच लिए। दर्द से कराहते हुए वह उठा तो उसकी आंखों के आगे एक पैंथर और दो शावक थे। डर से कांपते हुए उसने शोर मचाया। आंगन और आसपास के घरों में सोए लोग उठ गए। वे पैंथर की और हल्ला करते हुए बढ़े तो मादा पैंथर शावकों के साथ भाग गई। लोगों ने पीछा किया, लेकिन वह जंगल में घूम हो गए। परिजन उसे रात को ही गंभीर हालत में रामगढ़ अस्पताल ले गए। वहां मरहम पट्टी कराई और घर लेकर आए।

पैंथर ने अपने दांत उसके पैरों में गढ़ा दिए थे, ऐसे में दर्द से उसकी हालात खराब है। इधर, हमले की खबर मिलने के बाद आसपास के सभी नाकों से वनकर्मी पहुंच गए। इसके बाद से आसपास के क्षेत्र में पैंथर और शावकों की तलाश शुरू की। देर शाम तक उनका सुराग नहीं लगा।

रात 2 बजे पैंथर शावकों के साथ ढुकुआ फले में घुसी

आंगन में सो रहे अधेड़ को दबोचा, शोर पर भागा कुनबा
तपन बढ़ने के साथ ही वनक्षेत्र के ज्यादातर नदी-नालों में पानी सूख गया, भूख-प्यास की तलाश में बाहर आ रहे हंै वन्यजीव
हमले में घायल

रहे सावधान : पैंथर मांसाहारी जानवर है। ऐसे में उसे गर्मी भी ज्यादा लगती है। ऐसे में अन्य मांसाहारी जीवों की तरह पैंथर दिन की जगह शाम होने के बाद अपने आश्रय से बाहर निकलते है। दिन में वे गुफा या किसी घने पेड़ जैसे आश्रय में नींद निकालते है। शाम को जब थोड़ी ठंडक होती है तो वे पास के किसी पानी के स्त्रोत पर जाकर प्यास बुझाते है। इसी पानी तलाश में आसपास की बस्तियों में घुस जाते हैं और वहां शिकार जैसी स्थिति बन जाती है।

हर रोज शाम 5 बजे दिखता हैं कुनबा
गणेशपुर के आसपास ढेकुआ, टाटिया, भगोरा फला बस्तियों मैं पैंथर का का खौफ है। ग्रामीणों का शाम को निकलना भी मुश्किल हो गया है। हर शाम 5 बजे टाटिया में पहाड़ पर पैंथर और उसके शावक दिखाई देते हैं। ऐसे में डर का स्थिति का अनुमान लगाया जा सकता है। जानवरों पर तो हमले की घटना आम है, लेकिन अब इंसानों पर हमला डर की नई वजह है। ग्रामीणों ने पिंजरा लगाकर पैंथर को रेस्क्यू करने की मांग रखी।

जहां ज्यादा पानी, वहां खतरा अधिक
इन दिनों जिले में सर्वाधिक पानी की मात्रा जिस रेंज में है। इसी रेंज में हिंसक जानवरों का खतरा भी सर्वाधिक है। इसका मुख्य कारण यह है कि यहां हिंसक जानवरों की संख्या भी अधिक है। यहां वर्षभर वन संपदा हरी-भरी रहती है। इससे क्षेत्र में वन्यजीवों का कुनबा भी भरा-पूरा है।

इंसान पर हमले का कारण : इंसान पर हमले पैंथर सामान्य रूप से नहीं करते। विशेषज्ञों की माने तो उनके व्यवहार में इस तरह का बदलाव तभी आता है जब या तो उन पर किसी इंसान ने हमला किया हो, शावकों को वे असुरक्षित समझे या फिर शिकार के रूप में पशु नहीं मिले। चूंकि इस क्षेत्र में पैंथर पूरे कुनबे के साथ है, ऐसे में इंसानी दखल से वे गुस्से में हो सकते है।

पूर्व में भी पैंथर ने किया था बकरियों पर हमला
ढेकुआ फला में 4 माह पूर्व आलिया के घर पर पैंथर ने घर के बाहर बंदी बकरियों पर हमला किया था। जिसमें चार बकरी को मार दिया था। परिवार का दर्द है कि उन्हें अब तक सका मुआवजा नहीं मिला है। बकरी के शिकार पर दो हजार रुपए मुआवजे का प्रावधान है। सरपंच सुरता भगोरा, पूंजीलाल पाटीदार, थावरा भाई, वन विभाग से हरगोविंद पाटीदार, रमेश मीणा मौके पर बने हुए है। ग्रामीण भी कड़ी निगरानी रख रहे हैं।

12 अक्टूबर 2015 को आदमखोर हो चुके पैंथर ने आंगन में सोए मां बेटे को पैंथर ने निवाला बनाया था। डूंगरपुर वन रेंज के सरकण राणीघाटा क्षेत्र में काली देवी को पैंथर घसीटते हुए नीचे दर्रे में ले गया था। उसका आधा खाया हुआ शव दर्रे में सुबह मिला था। उसका दूधमुंहे बच्चे का सुराग आज तक नहीं लगा है। इससे पहले उंदरडा में भी पैंथर घर के बाहर खेल रही 5 साल की बच्ची को उठा ले गया था। उसका शव दूसरे दिन सर्च ऑपरेशन में मिला था। इसके बाद वन विभाग ने उसे आदमखोर घोषित कर दिया था। उसे पकड़ने के लिए डॉग स्कॉड से लगाकर पुलिस जैसे तमाम उपाय कर लिए थे। लेकिन रेस्क्यू करना विभाग के लिए तारे तोड़ने जैसी चुनौती थी। स्थिति यह हो गई थी कि शहर के गेपसागर, लोलकपुर, हिराता, सरकण, देवला, इंदौड़ा के बीच कहीं न कहीं उसके देखे जाने या पशुओं पर हमले, इंसानों का पीछा करने की घटनाएं हो रही थी। तत्कालीन डीएफओ शैलजा देवल ने एक्सपर्ट की टीम बुलाकर सर्वाधिक गतिविधियों वाले क्षेत्र को चिन्हित कर ट्रैप कैमरे लगवाए थे। इसके बाद पैंथर के रात को रुकने के क्षेत्र की स्थिति साफ हुई थी। बाद में ब्लूटूथ प्रणाली से पैंथर को रेस्क्यू किया जा सका था।

मुआवजा राशि का भी है प्रावधान
श्रेणी राशि

इंसान की मौत 4 लाख

स्थाई अयोग्य 2 लाख

अस्थाई अयोग्य 40 हजार

भैंस व बैल की मौत 20 हजार

गाय की मौत 12 हजार

श्रेणी राशि

बछड़े की मौत 04 हजार

बकरे या बकरी 02 हजार

ऊंट की मौत 20 हजार

खच्चर की मौत 20 हजार

(जैसा विभाग में दर्ज है)

रिकॉल
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