ऐनखेड़ा स्कूल के बच्चे प्रोजेक्टर से कर रहे पढ़ाई
ऐनखेड़ा गांव के प्राइमरी स्कूल के बच्चे प्रोजेक्टर से पढ़ाई कर रहे हैं। यह व्यवस्था स्कूल में पदस्थ शिक्षकों ने खुद व समिति के खर्चे पर की है। यह संभवत: ब्लॉक का पहला सरकारी स्कूल है, जहां इस तरह की व्यवस्था की गई है।
प्रोजेक्टर से पढ़ाई को लेकर बच्चों में उत्साह है, वे रुचिपूर्ण तरीके से पढ़ाई करते हैं। इस स्कूल के शिक्षकों ने स्कूल की वेबसाइट बनाई है। इस साइट पर महत्वपूर्ण और पाठ्यक्रम से जुड़ी जानकारी अपलोड की जाती है। शिक्षकों का कहना है इससे बच्चे टेक्नालॉजी से जुड़ेंगे।
ऐसे हुई शुरुआत
ब्लॉक के ऐनखेड़ा गांव में प्राथमिक और मिडिल स्कूल एक ही परिसर में संचालित है। सरकारी स्कूल में छात्रों की कम उपस्थिति और घटती दर्ज संख्या को देखते हुए शिक्षक योगेश कालभोर और प्रधान पाठक भीमराव दवंडे ने मिलकर कुछ नया करने का प्लान बनाया। ताकि बच्चे स्कूल आएं और पालक सरकारी स्कूल में बच्चों को दाखिला दिलाएं। शिक्षकों ने पहले साइट बनाई।
इस पर स्कूल की उपलब्धियां व अन्य जानकारियां अपलोड कीं। इसके बाद स्कूल को आकर्षक तरीके से सजाया और छात्रों को आधुनिक तरीके से पढ़ाई की सुविधा देने के लिए शिक्षकों व शाला प्रबंधन समिति के सहयोग से कम लागत में ऑन लाइन प्रोजेक्टर खरीद कर मंगाया। इससे अब स्कूल में प्रोजेक्टर से पढ़ाई हो रही है। वर्तमान में स्कूल में 100 बच्चे दर्ज हैं। इनमें 27 बच्चों के नए एडमिशन हुए हैं। स्कूल में 80 फीसदी बच्चे आ रहे हैं। शिक्षक ने बताया प्रोजेक्टर को लेकर बच्चों में उत्साह है। वे रुचि से पढ़ाई कर रहे हैं।
शिक्षकों ने खुद ही बनाई व्यवस्था, समिति के खर्च पर लाए प्रोजेक्टर, अब हो रही पढ़ाई
आठनेर। ऐनखेड़ा के स्कूल में प्रोजेक्टर से पढ़ाई करते हुए बच्चे।
नवोदय में चयन की तैयारी
स्कूल के 36 बच्चे कक्षा 8वीं की परीक्षा पास कर चुके हैं, वे नवोदय में चयन की तैयारी कर रहे हैं। स्कूल के शिक्षक तैयारी करवा रहे हैं। यह तैयारी प्रोजेक्टर पर चल रही है। इस प्रयास की प्रशंसा विधायक हेमंत खंडेलवाल ने उनके आठनेर दौरे के समय की। उन्होंने कहा मात्र 6 हजार रुपए की लागत से हाईटेक पढ़ाई की व्यवस्था बेहत्तर है। शिक्षकों ने विधायक को पढ़ाई के तरीकों की जानकारी दी। विधायक ने जिले के अन्य स्कूलों में भी ऐसे ही प्रयोग करने की बात कही। विधायक ने शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष सुखदेव लोखंडे, संजय अड़लक, शिक्षक योगेश कालभोर, प्रधान पाठक भीमराव दवंडे के प्रयासों की प्रशंसा की।