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जहरीले पानी के कारण खतरे में लोगों व असंख्य पशुओं का जीवन

3 वर्ष पहले
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किसान संघर्ष समिति श्रीगंगानगर एकता मंच पंजाब व किन्नू फार्मर्स क्लब के प्रतिनिधियों ने शुक्रवार को पंजाब के मुख्यमंत्री के नाम पर एक ज्ञापन उपमंडल अधिकारी पूनम सिंह को सौंपा। जिसमें अमृतसर के पास चीनी मिल का केमिकल युक्त जहरीला अपशिष्ट नदी में डाले जाने के कारण पानी के दूषित होने व हजारों की संख्या में मछलियों सहित जलीय जीवों के मारे जाने संबंधी बताया गया। ज्ञापन दाताओं ने कहा कि इसी तरह सतलुज नदी में भी जालंधर व लुधियाना की ओद्यौगिक ईकाइयों द्वारा केमिकल युक्त जहरीला पानी बुढ्ढा नाला व चिट्टी बेंई के माध्यम से सतलुज नदी में डाला जा रहा है। इसके विरुद्ध बार-बार रोष प्रदर्शन करने के बावजूद पंजाब सरकार व पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा बीते 10-11 वर्षों में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इन्हीं नदियों का पानी हरिके हैड वर्क्स से होता हुआ सरहिंद फीडर व इंद्रा गांधी नहर परियोजना द्वारा पंजाब व राजस्थान के तीन करोड़ लोगों तक पहुंचता है। ज्ञापन में कहा गया है कि 2013 में गंग कैनाल में पंजाब के क्षेत्र से लाखों की संख्या में मरी हुई मुर्गियां डाली गईं। इसके थोड़े दिन बाद ही इंद्रा गांधी नहर में पेस्टीसाइड की बोतलें डालने से लोगों में बीमारियां फैल गईं। उन्होंने कहा कि केमिकल तथा अन्य गंदगी डालने वाली ईकाइयों को तुरंत बंद किया जाए, यदि पंजाब सरकार ने इस बात पर ध्यान न दिया तो पंजाब व राजस्थान के किसान मिलकर जल आंदोलन शुरू करने पर विवश होंगे। इस अवसर पर किसान संघर्ष समिति के प्रवक्ता सुभाष सहगल, प्रमुख किसान नेता अमर सिंह बिश्नोई, राज कुमार जैन, गुरमीत सिंह प्रजापति, गोपीचंद सांदड, राजू पन्नीवाला, राज कुमार रिवाड़, राम नारायण आदि मौजूद थे। सहगल ने कहा कि अबोहर फाजिल्का, श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ में कैंसर रोगियों की बढ़ती संख्या का मुख्य कारण प्रदूषित जल की सप्लाई है। विशेषज्ञ मान चुके हैं कि कैमिकल युक्त नहरी पानी को साफ करने में जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित वाटर वर्क्स असमर्थ हैं।

किसान संघर्ष समिति ने एसडीएम को मुख्यमंत्री के नाम दिया ज्ञापन

एसडीएम को ज्ञापन सौंपते किसान संघर्ष समिति व किन्नू फार्मर्स क्लब के प्रतिनिधि।

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