विश्व बैंक के दल ने देखी ग्रीन हाउस तकनीक से खीरे की खेती
अजमेर|विश्व बैंक के दल ने शनिवार को पीसांगन पंचायत समिति में ग्रीन हाउस तकनीक से किए जा रहे खीरे के उत्पादन का अवलोकन किया। कृषि विभाग, पशुपालन और भूगर्भ विभाग द्वारा किए जा रहे अन्य कार्यों का भी निरीक्षण किया। दल की अगुवाई डाॅ. एडवर्ड कर रहे थे।
दल ने ग्रीन हाउस तकनीकी के तहत की जा रही खीरे की खेती से आर्थिक उन्नति प्राप्त करने की जानकारी ली। कृषक ने दल को अवगत कराया कि सीमित क्षेत्र से लगभग दस मैट्रिक टन खीरा उत्पादित किया जा कर मुनाफा प्राप्त किया जा रहा है। दल ने परियोजना अन्तर्गत वितरित थ्रेसिंग फ्लोर, बैटरी चलित स्प्रे मशीन, प्लास्टिक क्रैट्स, फसल प्रदर्शन तथा बीज उत्पादन की जानकारी प्राप्त कर अन्य कृषकों के द्वारा तकनीकी का अनुसरण कराने की आवश्यकता पर जोर दिया। पशुपालन विभाग द्वारा पशुपालकों को वितरित बकरे, चैफ कटर, अजोला यूनिट फीडिंग एवं वाटर ट्रफ वितरण की जानकारी दी गई। रेत के धोरों में सोलर पम्प के द्वारा पानी लिफ्ट कर सूक्ष्म सिंचाई संयंत्र, ड्रिप एवं मिनि स्प्रिकंलर के उपयोग से की जा रही गुलाब एवं सब्जियों की खेती को देख कर दल अभिभूत हुआ। दल में संयुक्त निदेशक कृषि जे.एस.संधू, वी.पी.सिंह, हिम्मत सिंह शेखावत, ओ.पी.यादव सम्मिलित थे। दल को जिला परियोजना प्रबंधक वीके शर्मा ने तीन वर्षों से परियोजना अंतर्गत किए गए कार्यों की जानकारी दी। इस अवसर पर पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. एसएस चांदावत आदि उपस्थित थे। पुष्कर संवाददाता के अनुसार विश्व बैंक के प्रतिनिधि एडवर्ड विलियम ने पुष्कर कस्बे की निकटवर्ती ग्राम पंचायत देवनगर सहित विभिन्न ग्राम पंचायतों में राजस्थान कृषि प्रतिस्पर्धात्मक परियोजना (आरएसीपी) के अंतर्गत कृषि तथा पशुपालन विभाग की ओर से कराए गए कार्याे का अवलोकन किया। विश्व बैंक की सहायता से संचालित इस परियोजना के माध्यम से पशुपालकों को अच्छी नस्ल के बकरे-बकरियों का वितरण किया गया। जिससे गरीब पशुपालक अपना जीवन निर्वाह कर रहे है। विश्व बैंक के प्रतिनिधि ने कृषि तथा पशुपालन विभाग के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि राजस्थान में जलाभाव से उत्पन्न विषम परिस्थितियों में कृषि के बाद पशुपालन ही ग्रामीण की जीविका का आधार है। उन्होंने बकरी पालन के आर्थिक लाभ बताते हुए कहा कि बकरी गरीब की गाय है।
कृषि उद्यानिकी का अवलोकन करते अधिकारी।