दफ्तर तो हैं अजमेर सिटी के, स्थित हैं गांवों में, इसलिए किराया भत्ता मिल रहा है आधा, आंदोलन की तैयारी
राजकीय महिला चिकित्सालय के नर्सेजकर्मियों ने भी कलेक्टर को ज्ञापन दिया।
सिटी रिपोर्टर | अजमेर
जिला स्तर पर स्वीकृत कई सरकारी कार्यालयों की लोकेशन ग्रामीण क्षेत्र में होना, वहां के अधिकारियों आैर कर्मचारियों के लिए नुकसान का सौदा साबित हो रहा है। एक तो शहर से 10 से 15 किलोमीटर दूर रोजाना आना-जाना, आैर ऊपर से मकान किराया भत्ता भी शहर के अनुरूप नहीं मिलना।
यहां के अधिकारियों आैर कर्मचारियों को शहर क्षेत्र से आधा मकान किराया भत्ता दिया जा रहा है क्योंकि कार्यालय की लोकेशन गांव में है। इस अव्यवस्था से अधिकारियों व कार्मिकों मे रोष व्याप्त है। उन्होंने सीएम को पत्र लिखकर अपनी पीड़ा सुनाई है, साथ ही कोषाधिकारी को निर्देशित कर शहर के अनुरूप मकान किराया भत्ता दिलाने की मांग की है।
वेतन बिलों में कम कर दिया मकान किराया भत्ता
कार्मिकों का कहना है कि - राज्य सरकार ने कार्यालय की स्थापना अपनी सुविधानुसार शहर में भवन व भूमि उपलब्ध नहीं होने के कारण जयपुर रोड घूघरा में स्थापित कर दिए। घूघरा ग्रामीण क्षेत्र है, लेकिन इन विभागों को कार्य क्षेत्र अजमेर जिला जोन लेबल का है। इन कार्यालयों को भी स्वीकृति के आधार पर मकान किराया भत्ता शहर के अनुरूप दिया जाना चाहिए। लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। कोषाधिकारी द्वारा वेतन बिलों में मकान किराया भत्ता इसलिए कम दिया जा रहा क्योंकि कार्यालय की लोकेशन ग्रामीण क्षेत्र में है।
अव्यवस्था के प्रति अफसरों व कार्मिकों में व्याप्त है रोष
वेतन बिलों में मकान किराया भत्ता कम किए जाने को लेकर अधिकारियों आैर कार्मिकों में इस अव्यवस्था के प्रति रोष व्याप्त है। उनकी मांग है कि शहर के लिए स्वीकृत जिन भवनोंं का निर्माण राज्यहित में ग्रामीण क्षेत्रों में किया गया है, वहां के अधिकारियों आैर कार्मिकों को मकान किया भत्ता अजमेर शहर के मकान किराया भत्ता के अनुरूप पारित किया जाए। यदि मांगे पूरी नहीं की गई तो आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी।