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‘आलस्य और प्रमाद उन्नति में बाधा’

3 वर्ष पहले
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अजमेर| केसरगंज स्थित आर्यसमाज के तत्वावधान में सत्संग भवन में रविवारीय साप्ताहिक सत्संग अमर सिंह शास्त्री के ब्रह्मत्व में देवयज्ञ व ब्रह्मयज्ञ से हुआ। यजमान चंदराम आर्य सप|ीक, हेमन्त, लालचंद आर्य, भागचंद गर्ग, सत्संग में प्रवचन स्वामी विश्ववंग ने बताया कि दुख से मुक्ति जिससे होती। वही विद्या है मनुष्य हमेशा दुख से छुटकारा पाने के लिए तथा सुख प्राप्ति के लिए प्रय|शील रहता है, मनुष्य के पास अधिक से अधिक ज्ञान प्राप्ति के साधनों के होते हुए भी मनुष्य दुखी रहता है क्योंकि प्राप्त ज्ञान का प्रयोग नहीं करता है मनुष्य की उन्नति में आलस्य तथा प्रमाद यह दो सबसे बड़े बाधक है। इसलिए अपनी उन्नति चाहने वाले मनुष्य को आलस्य तथा प्रमाद का त्याग कर देना चाहिए। तभी मनुष्य दुखों से मुक्त हो सकता है। ईश वंदना अमर सिंह शास्त्री ने की। भजन मनीषा शास्त्री ने गाए। सत्यार्थ प्रकाश कथा का वाचन राधेश्याम शास्त्री ने किया। सत्संग कार्यक्रम का संचालन समाज के मंत्री चंदराम आर्य ने किया।

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