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डीएफसीसीआई को तीन माह में करना होगा पुनर्वास

3 वर्ष पहले
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रेलवे की डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर योजना के तहत रेल लाइन बिछाने के लिए अवाप्त मकानों में तोड़फोड़ पर रोक काे लेकर सुभाष नगर क्षेत्र के लोगों की ओर से दायर रिट को हाईकोर्ट ने आंशिक रूप से मंजूर कर लिया है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को राहत देते हुए माना कि रेलवे व डीएफसीसीआई को प्रभावित पक्षकारों को तीन माह के भीतर पुनर्वास करना होगा, अन्यथा याचिकाकर्ता दुबारा कार्रवाई के लिए स्वतंत्र होंगे। हाईकोर्ट ने माना कि अवाप्ति कानून के तहत पुर्नवास के लिए जो नीति बनी है उसकी पालना की जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने डीएफसीसीआई की इस दलील को भी नामंजूर कर दिया कि याचिकाकर्ताओं को याचिका की बजाए आर्बिट्रेटर के समक्ष आपत्ति उठानी चाहिए थी। हाईकोर्ट ने कहा कि डीएफसीसीआई याचिकाकर्ताओं को 60 दिन का नोटिस जारी करने के लिए स्वतंत्र है। लेकिन 28 मार्च को जो नोटिस दिया गया उसमें सात दिन की समयावधि तय की गई थी जो विधिक प्रावधानों के विपरीत है। इससे पहले प्रकरण की प्रारंभिक सुनवाई में हाईकोर्ट ने तोड़फोड़ पर रोक लगा दी थी वहीं यह भी कहा था कि डीएफसीसीआई अन्य काम जारी रख सकती है। हाईकोर्ट के समक्ष सुभाष नगर क्षेत्र की निवासी वीना फाल्के सहित 15 लोगों ने वकील आनंद शर्मा के जरिये रिट व स्टे अर्जी दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि 2013 के जिस भूमि अवाप्ति कानून के तहत मकान अवाप्त किए जा रहे हैं उसमें स्पष्ट प्रावधान है कि मकान ध्वस्त करने से पहले पुनर्वास किया जाना जरूरी है। कम से कम 50 वर्गमीटर का मकान उपलब्ध कराना जरूरी है। बिना किसी पूर्व सूचना के 28 मार्च को नोटिस देकर मकान से बेदखल करना का आदेश दे दिया गया जो गलत है। डीएफसीसीआई के जवाब के बाद न्यायाधिपति संजीव प्रकाश शर्मा ने याचिका आंशिक रूप से मंजूर कर ली है। हाईकोर्ट ने पुनर्वास नियमों का हवाला देते हुए कहा कि इनकी पालना की जानी चाहिए। डीएफसीसीआई की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ताओं को आर्बिट्रेटर के समक्ष आपत्ति उठाने का विकल्प है इसलिए याचिका खारिज की जानी चाहिए इसे अदालत ने नामंजूर कर दिया।

अवाप्त मकानों में तोड़फोड़ का मामला, हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को दी राहत

अब आगे क्या ....

डीएफसीसीआई को प्रभावित पक्षकारों को नए सिरे से नोटिस जारी करते हुए 60 दिन में सुनवाई का पूरा मौका दिया जाएगा। प्रभावितों को अवाप्ति कानून 2013 के तहत शिड्यूल दो में तय की गई पुनर्वास नीति के तहत पुनर्वास करना होगा। इसके लिए डीएफसीसीआई को तीन महीने का समय दिया गया है। इस पुनर्वास नीति को डीएफसीसीआई ने स्वीकृत करने हुए ही डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के प्रोजेक्ट में शामिल किया है। कॉरिडोर का काम डीएफसीसीआई जारी रख पाएगी लेकिन प्रभावितों का पुनर्वास किस तरह किया जाएगा यह बड़ा मुद्दा है।

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