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बाल्यकाल में दिए गए संस्कार सदैव स्मरण रहेंगे: तीर्थाणी

3 वर्ष पहले
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अजमेर| बच्चों को बाल्यकाल से ही मातृ भाषा का ज्ञान करवाना व संस्कार देने से जीवनभर स्मरण रहेगा, उन्हें खेलकूद करवाने के साथ योग की भी शिक्षा आवश्यक देनी है। उक्त विचार भारतीय सिंधु सभा की ओर से आयोजित अजयनगर स्थित ईश्वर मनोहर उदासीन आश्रम में चतुर्थ सिंधी बाल संस्कार शिविर के शुभारंभ अवसर पर प्रदेश महामंत्री महेन्द्र कुमार तीर्थाणी ने व्यक्त किए।

कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता, झूलेलाल की मूर्ति के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और माल्यार्पण मुस्कान कोटवाणी, सृष्टि कलवाणी के साथ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नवलराय बच्चाणी, आश्रम के शंकर सबनाणी, खेमचंद नारवाणी अादि ने किया। आश्रम में आरती व भजन सहित सिंधी गीतों की प्रस्तुति विद्यार्थियों ने दी। स्वागत भाषण भगवान पुरसवाणी ने एवं आभार रमेश वलीरामाणी ने किया। मंच संचालन महेश टेकचंदाणी ने किया। संगठन मंत्री मोहन कोटवाणी ने बताया कि शिविर में 130 विद्यार्थियों को शिक्षण और गीत संगीत के साथ खेलकूद करवाए। महानगर मंत्री महेश टेकचंदाणी ने बताया कि 5वां सिंधी बाल संस्कार शिविर 22 मई को सुबह 8 बजे से पार्वती उद्यान अजयनगर में प्रारंभ होगा।

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