अजमेर| तीर्थ क्षेत्र नारेली में मुनि सुधासागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि वह व्यक्ति जो स्वयं को नहीं पहचानता वह अपने साथ शत्रु सा व्यवहार करता है। बहुत जन्मों के बीज लेकर आए हर जन्म में ऐसा ही किया तो कर्मों की शृंखला कभी खत्म नहीं होगी। इस जन्म में होशपूर्वक कर्म करते हुए अपने को पावन करने के लिए उप पतित पावन परमात्मा से मन व भावना को जोड़ना है।
जिसे जोड़ना आ जाता है उसमें नेतृत्व का गुण आ जाता है, क्योंकि अकेली उंगली बोझ नहीं उठा सकती, सारी उंगलियां मिल जाएं तो बोझ उठाने में कठिनाई नहीं आती। मिल कर काम करने से सभी सपने साकार हो सकते हैं। व्यक्ति अपनी शक्तियां पहचान लेता है तो विकास होता है। आपकी क्षमता से समस्याएं भागने लग जाएंगी। हर व्यक्ति को स्वयं अपना सर्वश्रेष्ठ मित्र बनना चाहिए।
सुधासागर महाराज के प्रवचन