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18 साल पुराने ट्रांसफार्मर में फॉल्ट के बाद केबल जली, डीजी सेट की एमसीबी में आग लगने से बिगड़ी व्यवस्था

3 वर्ष पहले
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संभाग के सबसे बड़े जवाहर लाल नेहरू अस्पताल की बिजली व्यवस्था राम भरोसे चल रही है। यहां पर बिजली सप्लाई के लिए 6 ट्रांसफार्मर लगे हैं, इनमें से अधिकांश 15 से 18 साल पुराने हैं। ये ट्रांसफार्मर आए दिन खराब हो जाते हैं।

शुक्रवार को वर्कशॉप के सामने वाले ट्रांसफार्मर में फाल्ट आ गया, केबल जल गई। कुछ ही देर में डीजी सेट की एमसीबी में आग लग गई। देखते ही देखते ट्रांसफार्मर ने भी आग पकड़ ली। मौके पर मौजूद कार्मिकों ने जैसे-तैसे आग पर काबू पाया। 12 घंटे से अधिक समय तक बिजली गुल रही। रात 8.30 पर आरएसईबी की लाइन चालू हो पाई। सबसे अधिक परेशानी केबल फॉल्ट ढूंढने में आ रही है।

वर्कशॉप के सामने लगा ट्रांसफार्मर करीब 18 साल पुराना है। इसे बदलने के लिए कई बार वर्कशॉप प्रभारी ने लिखकर अस्पताल प्रशासन को दिया। लेकिन किसी ने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया। सुबह 7.55 बजे बिजली गुल हो गई। ऐसे में ऑटोमेटिक डीजी सेट ऑन हो गया। कुछ देर बाद ही सेट का सायरन बजने लगा और एमसीबी में आग लग गई। देखते ही देखते ट्रांसफार्मर में आग लगने लगी। आग लगने से कई केबल भी जल गई। वर्कशॉप में मैनपावर ही नहीं है। स्टाफ की भारी कमी है। काम को शुरू करने में पसीने आ गए।

12 घंटे से अधिक समय तक आधा जेएलएन अस्पताल रहा अंधेरे में, टार्च की रोशनी में इलाज

हकीकत : वर्कशॉप में मैनपावर नहीं
िजम्मेदारों पर सवाल उठाती अंधेरे में डूबी अस्पताल की तस्वीर...

अस्पताल में बिजली आपूर्ति के लिए लगे ट्रांसफार्मर 15 से 18 साल पुराने हैं। इन्हें बदलने के लिए कई बार लिखा गया, पर जिम्मेदारों ने अभी इसकी सुध नहीं ली है।

यहां हुई बिजली गुल
इस ट्रांसफार्मर से सभी मेडिकल ओपीडी, स्किन ओपीडी, ईसीजी, नेत्ररोग ओपीडी, सर्जरी ओपीडी, ऑर्थो पैडिक ओपीडी, ईएनटी ओटी, आई ओटी, एक्स रे, सीटी स्कैन, ब्लड बैंक, फीमेल मेडिकल ए-बी, केंद्रीय प्रयोगशाला 118-119, ब्लड जांच प्रयोगशाला, स्पेशल वार्ड, ईएमआर बिल्डिंग, सेंटर स्टोर, पंप हाउस की सप्लाई बाधित हो गई।

दर्जनभर ऑपरेशन टले...
जिन मरीजों के ऑपरेशन किए जाने थे उन्हें ऑपरेशन की ड्रेस पहना दी और बाहर बैठा दिया गया। लेकिन सुबह अस्पताल के आधे हिस्से में लाइन नहीं आ रही थी। बिजली नहीं होने से ईएनटी ओटी में करीब 8 से 10 ऑपरेशन नहीं हो सकते। नेत्र रोग विभाग में 16 ऑपरेशन नहीं हुए। इसी प्रकार अस्थिरोग विभाग के ऑपरेशन थियेटर में भी काम नहीं हुआ।

जिम्मेदारों का कहना है...
पुराना ट्रांसफार्मर अब सुधर नहीं सकता। अस्पताल अधीक्षक डॉ. अनिल जैन ने 15 दिन की अंडर टेकिंग लेकर टाटा पावर से नया ट्रांसफार्मर मंगवा लिया है। बदलने की कार्यवाही चल रही है। फिलहाल डीजी सेट से अस्पताल को बिजली सप्लाई की जा रही है। -शैलेष पाठक, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी (बिजली) जेएलएन इकाई

नतीजा : केबल फॉल्ट ढूंढने में मशक्कत
सुबह ट्रांसफार्मर के पैनल में आग गई थी। टाटा पावर के अधिकारियों को बुला लिया गया है। नया ट्रांसफार्मर लगाने का काम चल रहा है। अस्पताल के आधे हिस्से में बिजली बंद रही थी। -डॉ. अनिल जैन अधीक्षक जेएलएन अस्पताल

गोरखपुर जैसा हो सकता है हादसा
जेएलएन शिशु रोग विभाग में लगे ट्रांसफार्मर की केबल में कई बार फॉल्ट आ चुका है। डीजी सेट का ऑपरेशन भी ऑटोमेटिक नहीं है। लाइट चले जाने पर कर्मचारी हाथ से स्विच ऑन करने के लिए आता है। 18 अक्टूबर 2017 को एमसीबी और एटीएस पैनल कॉन्टेक्टर में आग लग गई थी। इसकी मरम्मत के लिए भी कई बार वर्कशॉप द्वारा लिखा गया है। शिशु रोग विभाग में एनआईसीयू, आईसीयू जैसे वार्ड हैं, जहां पर हर समय 150 से 200 नवजात शिशु हर समय भर्ती रहते हैं।

मरीज भी नहीं देखे जा सके | ईएनटी और नेत्ररोग विभाग में बिना बिजली मरीजों की जांच करना संभव नहीं है। दोनों ही यूनिट में मरीज देखे नहीं गए। इसी प्रकार एक्स रे एवं सीटी स्कैन का कामकाज भी बाधित रहा।

ट्रांसफार्मर सुधारता टाटा पॉवर का कर्मचारी।

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