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डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के लिए मकानों में तोड़फोड़ पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

3 वर्ष पहले
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रेलवे की डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर योजना के तहत रेल लाइन बिछाने के लिए अवाप्त मकानों को तोड़फोड़ का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है।

रेलवे के इस प्रोजेक्ट से पीड़ित मकान मालिकों की ओर से दायर याचिका पर हाईकोर्ट की एकलपीठ ने प्रारंभिक सुनवाई करते हुए फिलहाल तोड़फोड़ पर रोक लगा दी है। वहीं डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कार्पोरेशन को कहा गया है कि अन्य काम जारी रख सकते हैं। प्रकरण में आगामी सुनवाई 23 अप्रैल को होगी। हाईकोर्ट के समक्ष वीना फाल्के व अन्य ने वकील आनंद शर्मा के जरिये रिट व स्टे अर्जी दायर की थी। इधर डीएफसीसी को आशंका थी कि मामला हाईकोर्ट पहुंचेगा इसलिए पहले ही केविएट दायर की हुई थी।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि 2013 के जिस भूमि अवाप्ति कानून के तहत मकान अवाप्त किए जा रहे हैं उसमें स्पष्ट प्रावधान है कि मकान ध्वस्त करने से पहले पुनर्वास किया जाना जरूरी है। कम से कम 50 वर्गमीटर का मकान उपलब्ध कराना जरूरी है। उनका यह भी कहना है कि बिना किसी पूर्व सूचना के 28 मार्च को नोटिस देकर मकान से बेदखल करना का आदेश दे दिया गया जो गलत है। इधर डीएफसीसी का कहना था कि 28 मार्च के नोटिस से पहले बाकायदा दो बार अखबार में नोटिस प्रकाशित करवाए गए हैं और विधिपूर्वक अवाप्ति की कार्रवाई की गई है।

डीएफसीसी की ओर से कहा गया कि इस बाबत विस्तृत जवाब पेश करेंगे। एकलपीठ ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद कहा कि जवाब आने पर ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। ऐसे में जवाब पेश होने तक डीएफसीसी याचिकाकर्ताओं के मकान नहीं तोड़े। डीएफसीसी को प्रोजेक्ट से जुड़े अन्य काम करने पर कोई रोक नहीं है।

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