परिस्थितिवश जेल में रह रहे बच्चों पर ना पड़े नकारात्मक असर, समुचित देखरेख हो
महिला बंदियों के साथ जेलों में पल रहे उनके बच्चों की शारीरिक व मानसिक अवस्था को लेकर राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार बुधवार को संयोगिता नगर स्थित एडीआर भवन में कार्यशाला का आयोजन किया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से आयोजित कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष चंद्रभान गुप्ता ने प्रतिभागियों को संबोधित किया।
गुप्ता ने अपने संबोधन में बताया कि जेलों में बंद महिला बंदियों के साथ कई बार परिस्थितिवश उनके छोटे बच्चों को भी साथ रहना पड़ता है। ऐसे बच्चों की शारीरिक व मानसिक स्थिति सहित उनकी समुचित देखरेख हो व जेल के जीवन का उन पर असर नहीं हो इसके मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्णय पारित किया था।
प्राधिकरण के सचिव राकेश गोरा ने इस अवसर पर महिला बंदी व उनके साथ निवासरत बालकों के अधिकारों व कल्याण उनके लिए विधिक सहायता, स्वास्थ्य, शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण की आवश्यकता व भूमिका पर प्रकाश डाला। महिला बंदियों को जेल से रिहा होने पर तुरंत पुनर्वास की आवश्यकता होती है ऐसे में वे स्वयंसेवी संस्थाएं जो इस दिशा में महिलाओं व बच्चों के कल्याण हेतु कार्यरत है उनसे महिला बंदी की जानकारी साझा कर उसके पुनर्वास हेतु निर्देशित कर सकती हैं। विशेष बालकों, विमंदित बालकों, अपाहिज बालकों की विशेष देखभाल हेतु स्वयं सेवी संस्थाओं द्वारा जेल अधिकारियों, महिला एवं बाल विकास विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर उनके स्वास्थ्य, मनोविनोद व शैक्षणिक उन्नयन की आवश्यकताओं पर कार्य किया जाना चाहिए। कार्यशाला में मनोचिकित्सक विभाग से डाॅ चरण सिंह जिलोवा, महिला एवं बाल विकास विभाग से नगेन्द्र सिंह, कारागृह विभाग से शिवेंद्र कुमार शर्मा,स्वास्थ्य विभाग से डाॅ रामस्वरूप किराड़िया, शिक्षा विभाग से नरेंद्र सिंह, स्वयंसेवी संस्थाओं में पीयूसीएल से अंजू नयाल, पैनल अधिवक्ता नीलू सैन, गीतांजलि राठौड़, अनिता रावत ने कार्यशाला में प्रशिक्षण प्राप्त किया।