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सरकारी मंजूरी में भी लेटलतीफी

3 वर्ष पहले
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पिछले दिनों हाउसिंग बोर्ड ने वैशाली नगर में विभिन्न श्रेणी के 6 आवासों की थी नीलामी

सिटी रिपोर्टर | अजमेर

सरकारी महकमों में आम आदमी को तो अपने कार्यों के लिए चक्कर काटना आम बात है, लेकिन महकमे के स्वयं के काम पर ही अफसरशाही हावी है। बोर्ड ने करीब बीस दिन पहले 3 करोड़ रुपए के आवासों की नीलामी की थी, लेकिन मुख्यालय से स्वीकृति नहीं मिलने के कारण राशि वसूलने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। बोर्ड को इससे राजस्व का नुकसान हो रहा है।

पिछले दिनों हाउसिंग बोर्ड ने वैशाली नगर में विभिन्न श्रेणी के 6 आवासों की 23 अप्रैल को नीलामी की थी। आवास की कीमत 25 लाख से लेकर 70 लाख रुपए तक थी। रियल स्टेट में मंदी के बाद भी नीलामी में अपेक्षा से अधिक राशि आई थी। नियमानुसार सफल आवेदकों को नीलामी होने के 48 घंटे के भीतर 25 प्रतिशत राशि जमा करानी थी। शेष 75 प्रतिशत राशि बोर्ड के नोटिस एक माह क भीतर जमा करानी थी। सूत्रों के अनुसार बोर्ड ने नीलामी होने के बाद स्वीकृति के लिए मुख्यालय को पत्र लिखा था, जिसमें आवासों की दर उचित बताई गई थी। सूत्रों के अनुसार दो सप्ताह से अधिक का समय बीतने के बाद भी मुख्यालय से स्वीकृति नहीं आई है। इसके चलते बोर्ड सफल आवेदकों को राशि जमा कराने का नोटिस जारी नहीं कर पा रहा है। सूत्रों का कहना है कि बोर्ड जितनी देरी से नोटिस जारी करेगा, उतनी देरी से राशि जमा होगी। इससे बोर्ड को ब्याज के नुकसान के साथ बड़ी राशि से वंचित होना पड़ेगा।

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