जो जितने अधिक विरोधों को सहन करता है वह जीवन में उतना ही अधिक महान बनता है
अजमेर | संसार में वही धनवान है जिसके पास सदाचार है और निर्धन वही है जो अपने व्रतों से विचलित हो गया है। जो धर्मात्मा सदाचारी पुरुष है वह संसार के पापों से डरता है, चाहे बाप से ना डरो लेकिन पाप से डरो। लेकिन दुराचारी व्यक्ति मरण का तो भय करता है लेकिन पापों से नहीं डरता। वह निरंतर पापों में संलग्न रहकर दुखों का ही अर्जन करता है।
ज्ञानोदय तीर्थ क्षेत्र नारेली में बुधवार को सुधासागर महाराज ने धर्म सभा में कहा कि जो व्यक्ति जितने अधिक विरोधों को सहन करता है वह व्यक्ति जीवन में उतना ही अधिक महान बनता है। धर्म के रहस्य को समझने वाले कभी भी प्रतिकूल प्रसंगों मे घबराते नहीं है उनका डटकर मुकाबला करते है। आज व्यक्ति जितना अधिक धर्म से दूर होता जा रहा है उतना ही अधिक तनावों से ग्रसित होता जा रहा है। जीवन अमूल्य क्षणों का जो सदुपयोग करते है वे जीवन में समयसार रूप आत्मा को प्राप्त कर लेते है। शरीर की गुलामी करने वाला इन्द्रियों की गुलामी करते-करते अनन्त समय को व्यतीत कर दिया शरीर और इन्द्रियों की गुलामी से ऊपर उठने वाला व्यक्ति आत्मा की सेवा करता हुआ पूर्ण स्वतंत्रता को प्राप्त करता है।