अच्छे विचार हैं तो वृद्ध भी कहला सकते युवा
अजमेर|ज्ञानोदय तीर्थ क्षेत्र नारेली में स्थित प्रवचन पांडाल में सुधा सागर महाराज ने धर्म सभा में कहा कि युवा वह होता है जो आवेश नहीं करता, विपरीत, प्रसंगों में तनाव नहीं करता। जो समता का सहारा लेकर विपरीत प्रसंगों से लोहा लेता है। वृद्ध इनसे विपरीत होता है। 30-40 वर्ष का युवा भी वृद्ध कहला सकता है और 80-90 वर्ष का वृद्ध भी युवा कहला सकता है। युवकों के अंदर अगर कर्तव्य परायणता, सजगता, जागरूकता, चरित्र निष्ठ आदि गुण है तो अपने आचरण की सुवास से जन-जन को सुवासित कर सकता है। धर्म की शरण में आने वाला व्यक्ति नर से नारायण, इंसान से भगवान बन जाता है। आप जैसा चाहे वैसा कर सकते हैं, अशुभ को आप शुभ बना सकते हैं, पाप को पुण्य रूप कर सकते हैं।