पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Rajasthan
  • Ajmer
  • सीवरेज लाइन की आज तक नोड टेस्टिंग नहीं नतीजा : चैम्बर से गंदा पानी सड़कों पर बह रहा

सीवरेज लाइन की आज तक नोड टेस्टिंग नहीं नतीजा : चैम्बर से गंदा पानी सड़कों पर बह रहा

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
नगर निगम स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर में 30 हजार सीवर कनेक्शन करने जा रहा है। इसके लिए निविदाएं जारी कर दी गई हैं। इधर निगम प्रशासन 15 हजार कनेक्शन संभाल नहीं पा रहा है, शहरभर में जगह-जगह सीवर लाइनें चौक पड़ी हुई हैं। चैम्बर से गंदा पानी सड़कों पर आ रहा है। यदि 30 हजार सीवर कनेक्शन और दे दिए जाते हैं तो इंतजाम संभालना और भी मुश्किल होगा।

सीवर का मिसिंग लिंक, गुणवत्तारहित क्रियान्वयन के कारण हालात इतने बिगड़े कि करोड़ों का रुपए का बंटाधार होने के बावजूद व्यवस्था पटरी पर नहीं आ सकी। शहर में बिछाई गई सीवर लाइन की कभी भी नोड टेस्टिंग नहीं हुई। इसमें एक-एक लाइन की टेस्टिंग की जाती है। इससे यह पता चलता है कि लाइन कहां अवरुद्ध है। मौके पर ही उसे खोल दिया जाता है। यह प्रक्रिया उबाऊ और लंबी होने के कारण वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी इसका अनुशरण ही नहीं करते।

16 साल गुजर गए, अब तक डल रही सीवर लाइन

हैरानी की बात यह है कि शहर में वर्ष 2002 में आरयूआईडीपी ने 70 करोड़ की लागत से 207 किलोमीटर सीवर लाइन बिछाने का काम शुरू किया था। जिन लोगों के जिम्मे यह काम सौंपा गया, वह अपने एसी चैंबर से बाहर निकले नहीं, ठेकेदार ने अपनी ही मर्जी से शहर में लाइनें बिछाना शुरू कर दिया। अलग-अलग पैकेज में सीवर लाइन का काम किया गया। खुदाई में जहां पर परेशानी आई, काम को छोड़ दिया या फिर लाइन की दिशा ही बदल दी।

207 में से 167 की टेस्टिंग, शेष का क्या रहा पता नहीं

आरयूआईडीपी द्वारा डाली गई 207 किलोमीटर लाइन में से पहले चरण में 137 किलोमीटर की टेस्टिंग की गई। 30 किलोमीटर की टेस्टिंग एडीए द्वारा की गई। शेष 40 किलोमीटर लाइन का क्या हुआ, इसका पता नहीं है। मिसिंग लिंक शहर के लिए सबसे बड़ा जंजाल बन गया है। हालात यह है कि शास्त्रीनगर, धोलाभाटा, जेएलएन चौराहा, कुन्दन नगर, सागर विहार, सिविल लाइन, क्रिश्चियन गंज, स्टीवंज स्कूल के पास सहित क्षेत्र के हालात यह हैं कि यहां पर सीवर से गंदा पानी निकलने लगा है। लोगों के घरों के बाहर जमा हो रहा है। गंदगी फैल रही है। इसके बावजूद कोई जिम्मेदार अधिकारी यह परेशानी दूर करने के लिए आगे नहीं आ रहा है।

65 हजार सीवर कनेक्शन का लक्ष्य, फिलहाल 15 हजार कनेक्शन हुए

शहर में करीब एक लाख घर बने हुए हैं। जलदाय विभाग ने इन घरों में लगभग 1.5 लाख पानी के कनेक्शन दे रखे हैं। कई घर ऐसे भी जहां पर दो या तीन पानी के कनेक्शन है। ऐसे में निगम ने 65 हजार सीवर कनेक्शन का लक्ष्य रखा है। वर्तमान में 15000 हजार कनेक्शन निगम स्तर पर जारी कर दिए गए हैं। इधर खानपुरा एसटीपी के रख रखाव को लेकर ठेकेदार से रुपयों के लेन देन को लेकर झगड़ा चल रहा है। यह मामला राज्य सरकार के समक्ष विचाराधीन है। ठेकेदार ने भी उक्त एसटीपी को बंद कर दिख है। अब निगम ने 30 कराेड़ रुपए स्मार्ट सिटी फंड से लिए हैं। इनसे 30 हजार घरों में कनेक्शन किए जाने हैं। इसके लिए निगम स्तर पर निविदा जारी कर दी गई है। इसी प्रकार 82 करोड़ की लागत से फॉयसागर इलाके में 82 करोड़ की लागत से 46 किलोमीटर सीवर लाइन डालने का काम चल रहा है। इसमें 7 हजार कनेक्शन दिए जाएंगे। इस तरह शहर में 52 हजार कनेक्शन हो जाएंगे।

हर घर से जाता है 500 लीटर पानी सीवर में

जलदाय विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 150 लीटर पानी प्रति व्यक्ति प्रतिदिन खपत मानी जाती है। 750 लीटर प्रति घर पानी की सप्लाई विभाग द्वारा की जाती है। विभाग का अनुमान है कि 20 प्रतिशत पानी उपयोग में शेष 80 प्रतिशत पानी सीवर में वेस्टेज जाता है। इस प्रकार प्रतिदिन लाखों गैलन पानी नालियों में बहा दिया जाता है। यदि 52 हजार कनेक्शन वाले घरों का पानी सीवर से होकर निकलेगा। यही सीवर लाइन ही चौक हो ताे यह पानी घरों के बाहर या गलियों में जमा होने लगेगा और आमजन के लिए परेशानी का सबब बन जाएगा।

संसाधन ही नहीं तो कैसे हो मेंटिनेंस

2007 में निगम को सीवर लाइनों के रखरखाव की जिम्मेदारी सौंप दी गई। 11 साल बीतने के बाद भी निगम के पास न तो अपने संसाधन हैं और न ही अब तक यह पता चल सका है कि शहर में मिसिंग लिंक कितने हैं, जिन्हें जोड़ा जाना है। फिलहाल हालात यह हैं कि निगम के पास तीन पंप हैं, इनमें भी दो खराब हैं, एक ही पंप से शहर की सीवर लाइनों की सफाई की जा रही है। निगम के पास सीवर लाइन के ऑपरेशन एवं मेंटिनेंस के लिए तकनीकी रूप से सक्षम स्टाफ ही नहीं है।

क्यों नहीं खरीदी सुपर सोकर मशीन

हैरानी की बात यह है कि वर्षों से बंद पड़ी सीवर लाइन को चालू करने के लिए कई बार सुपर सोकर मशीन खरीद पर चर्चा भी हुई। तत्कालीन प्रमुख शासन सचिव मनजीत सिंह ने सहमति भी प्रदान कर दी थी, यह मशीन भी फाइलों का हिस्सा बनकर रह गई और आज तक खरीद संभव नहीं हुई।

कुछ खामियां हैं, करेंगे दूर

सीवर सिस्टम को चालू करने के लिए कुछ खामियां है। इन्हें दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। खानपुरा एसटीपी ठेकेदार का रुपयों के लेन देन को लेकर विवाद है जो सरकार के समक्ष विचाराधीन है। सीवर लाइन ठीक करने की मशीन खराब है इसे दिखवाया जाएगा।’ हिमांशु गुप्ता, आयुक्त नगर निगम

खबरें और भी हैं...