मोबाइल सिम आधार से लिंक कराने का झांसा, अधिकारी के खाते से 1 लाख पार
डीआरएम ऑफिस में कार्यरत एक अधिकारी को ऑनलाइन चीटिंग करने वाले गिरोह ने शिकार बना लिया। शातिर ठग ने खुद को मोबाइल कंपनी का प्रतिनिधि बताते हुए रेलवे अधिकारी के मोबाइल पर फोन कर उन्हें सिम आधार से लिंक कराने का झांसा देकर आधार कार्ड नंबर और बाद में बैंक से लिंक अन्य मोबाइल नंबरों का ब्यौरा ले लिया और उनके बैंक खाते से एक लाख दस हजार रुपए हो गए। अलवर गेट थाना प्रभारी हरिपाल सिंह के अनुसार शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की तफ्तीश साइबर क्राइम सेल की मदद से की जा रही है। उल्लेखनीय है कि आधार कार्ड नंबरों से ऑनलाइन चीटिंग का यह पहला मामला सामने आया है। जिला पुलिस की साइबर क्राइम सेल सतर्कता मामले की जांच में जुटी है। इस चीटिंग में मोबाइल कंपनी के प्रतिनिधियों की भी मिलीभगत होने की आशंका है।
आधार नंबर के बाद शातिर ने ओटीपी कोड भी कर लिया था हासिल, एफआईआर दर्ज
रेलवे अधिकारी संदीप चटर्जी ने मामले में अलवर गेट थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि उसके पास 4 अप्रैल को मोबाइल फोन पर कॉल आया था। कॉल करने वाले ने बताया था कि वह एयरटेल कंपनी का प्रतिनिधि है। आपकी मोबाइल सिम आधार लिंक करनी है, इस कारण आपका नंबर एक दिन बंद रहेगा। कॉल करने वाले ने उनसे आधार कार्ड का नंबर भी लिया था। एक के बाद एक तीन कॉल कथित एयरटेल कंपनी के प्रतिनिधि ने किए और आधार कार्ड के अलावा संबंधित बैंक खातों की जानकारी ली। पांच अप्रैल को उसके पास फिर कॉल आया और कहा गया कि आपकी सिम आधार से लिंक हो रही है, इस बारे में एक ओटीपी मैसेज आपके मोबाइल पर आया है, इसके बारे में जानकारी दें। उन्होंने ओटीपी नंबर बता दिया था। इसके बाद पता चला कि उनके तीन बैंकों के खातों से तीन बार में एक लाख दस हजार की राशि ऑनलाइन विड्रोवल कर ली गई। चटर्जी के अनुसार ठग ने उसके आईसीआईसीआई बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और यूनियन बैंक के खातों से राशि निकाली है।
फोन कॉल पर नहीं दें किसी को भी आधार कार्ड नंबर, अकाउंट व एटीएम की जानकारी
जिला पुलिस की साइबर क्राइम सेल के प्रभारी जगमाल सिंह ने बताया कि ऑनलाइन चीटिंग करने वाले गिरोह ने यह नया शातिराना तरीका अपना लिया है। इसके तहत वे मोबाइल फोन सिम धारकों से आधार लिंक कराने का झांसा देकर उनसे आधार कार्ड नंबर प्राप्त कर लेते हैं। इस नंबर के आधार पर मोबाइल कंपनी के प्रतिनिधियों से मिलीभगत कर उसी नंबर की दूसरी सिम जारी करवा लेते हैं, बाद में बैंक अकाउंट की जानकारी हासिल कर ऑनलाइन मनी ट्रांसफर करते हैं। आधार कार्ड नंबर से जारी नई सिम में बैंक से ओटीपी नंबर खुद ठग के पास ही आते हैं। अगर सिम जारी नहीं कराने की स्थिति में शातिर ठग शिकार से दुबारा फोन कॉल कर यह कहते हैं कि आपकी सिम आधार से लिंक हो रही है, एक फोन मैसेज में ओटीपी नंबर आएगा। यह नंबर आप तुरंत उन्हें बता दें। ओटीपी नंबर मिलते ही कुछ ही सेकेंड में खाते से राशि पार कर ली जाती है। थाना प्रभारी हरिपाल सिंह के अनुसार आमजन सावधानी बरतें तो ऑनलाइन चीटिंग से बचा जा सकता है। इसके लिए लोगों को यह पता होना चाहिए कि फोन कॉल कर कोई भी मोबाइल कंपनी, बैंक या अन्य संस्थाएं आधार कार्ड, बैंक अकाउंट या एटीएम कार्ड के बारे में जानकारी नहीं मांगती है। लोगों को ठगों से सावधान रहने की जरूरत है।