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आरएएस ने एडीए के जिस बाबू को बताया था जालसाजी का मास्टरमाइंड, पुलिस ने चार्जशीट में उसे क्लीनचिट दी

3 वर्ष पहले
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जाली आवंटन पत्र के जरिये दो बेशकीमती प्लॉट की लीज डीड जारी कराने के मामले में एडीए के पूर्व उपायुक्त व आरएएस अधिकारी सुखराम खोखर ने जिस बाबू को मास्टर माइंड माना था उसे पुलिस ने क्लीन चिट दे दी है।

सिविल लाइंस थाना पुलिस ने पिछले साल फरवरी में हुए जालसाजी के बड़े मामले में भू कारोबारी बशीर खान सहित एडीए के बाबू करण सिंह व पट्टा अपने नाम कराने वाले भोलू खां के खिलाफ मंगलवार को चार्जशीट पेश कर दी। वहीं मामले में बाद में मुल्जिम बनाए गए एडीए के बाबू अशोक सिहं रावत को यह कह कर बाहर कर दिया कि फाइल पर उसकी किसी तरह की लिखावट नहीं है।

सिविल लाइंस थाना पुलिस की तत्कालीन थानाधिकारी करण सिंह और पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय में तैनात अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पूरण सिंह भाटी ने इस मामले की जांच की थी और उसके आधार पर पुलिस ने चार्जशीट पेश की है। पूरे मामले का दिलचस्प पहलू यह है कि जालसाजी की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज कराने वाले और प्रकरण में विभागीय जांच करने वाले एडीए के उपायुक्त व आरएएस अधिकारी सुखराम खोखर ने अपनी जांच रिपोर्ट में मुल्जिम करण सिंह को मात्र मोहरा बताते हुए बाबू अशोक सिहं रावत को मास्टर माइंड माना था। खोखर की रिपोर्ट एडीए के कार्मिकों के बयान और दस्तावेजों पर आधारित थी।

जाली पट्टे बनाने के लिए चली फाइल पर बाबू अशोक सिंह रावत ने ही हर अधिकारी व कर्मचारी से कार्रवाई की सिफारिश करते हुए अपने मिलने वाले का मामला बताया था। लेकिन पुलिस ने अशोक के इस कृत्य को साफ तौर पर नजरअंदाज करते हुए उसे क्लीनचिट दे दी।

फाइनेंस डायरेक्टर रश्मी बिस्सा का दिलचस्प बयान

चार्जशीट में एडीए की फाइनेंस डायरेक्टर रश्मि बिस्सा का बयान भी दिलचस्प है जिन्होंने अशोक की सिफारिश पर पट्टे जारी किए थे। बिस्सा ने पुलिस को दिए बयान में कहा है कि योजना प्रभारी के नाते उन्हें काम का ज्यादा अनुभव नहीं था और एडीए के कार्मिक इस तरह के कामों के लिए ऐसी सिफारिशें करते हैं इसलिए अशोक की सिफारिश पर पट्टे साइन कर दिए थे और जब मालूम पड़ा कि जालसाजी से करवाए गए हैं तो उच्चाधिकारियों से विचार विमर्श कर पट्टे वापस मंगवा लिए थे।

यह है मामला

एडीए के तत्कालीन उपायुक्त सुखराम खोखर ने 3 मार्च 17 को रिपोर्ट दी थी कि फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से पंचशील योजना के बी-251 व सी-161 के पट्टे जारी करवा लिए गए। जांच में पता चला कि कायमपुरा निवासी भोलू खां पुत्र बाबू खां ने दोनों प्लाट के पट्टों के लिए आवेदन किया था। आवेदन भू कारोबारी बलदेव नगर निवासी बशीर खान के रेफरेंस से पेश हुआ था और बाद में बशीर ही एकल खिड़की से पट्टे ले गया। जांच में मालूम हुआ कि जाली आवंटन पत्र के जरिये पट्टे लिए गए हैं। इसमें योजना शाखा के बाबू करण सिंह की भूमिका रही है। इसके बाद खोखर ने विभागीय जांच पूरी करते हुए माना कि जाली आवंटन पत्र से पट्टे जारी कराने के लिए कर्मचारियों और अधिकारियों को योजना शाखा के ही वरिष्ठ बाबू अशोक सिंह रावत ने सिफारिश की थी। खोखर ने अपनी रिपोर्ट में माना कि फाइल पर नोट शीट चलाने वाला बाबू करण सिंह तो मोहरा मात्र है।

जांच बदली और नतीजे में मिली क्लीन चिट

एडीए प्रशासन ने करण सिंह और अशोक सिंह रावत को निलंबित कर दिया जिसके खिलाफ दोनों ने हाईकोर्ट में याचिका पेश की व एडीए के निलंबन आदेश पर स्थगन प्राप्त कर लिया। इधर, सिविल लाइंस थाना पुलिस ने जांच में ढिलाई बरती और रसूखात के चलते जांच अधिकारी बदल दिया गया। आईजी आफिस में तैनात एडिशनल एसपी को आगामी जांच सौंप दी गई। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने एक ओर जहां अशोक सिंह रावत को क्लीन चिट दे दी वहीं जाली पट्टे जारी करने वाली अधिकारी रश्मि बिस्सा के बयान का हवाला देते हुए माना कि एडीए में कार्मिक अक्सर ऐसी सिफारिशें करते हैं जिससे पट्टे जारी कर दिए थे और पता चलने पर पट्टे वापस मंगवा लिए।

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