जिला पुलिस नशे के खिलाफ अभियान के बारे में हाईकोर्ट में आज पेश करेगी रिपोर्ट
राजस्थान उच्च न्यायालय ने अजमेर में नशे की गिरफ्त में फंसे बच्चों को मुक्त कराने की दिशा में जिला पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई के बारे में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। जिला पुलिस की ओर से बुधवार को हाई कोर्ट में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की प्रगति रिपोर्ट पेश की जाएगी।
एसपी राजेन्द्र सिंह चौधरी के अनुसार नशे की आदत के शिकार बच्चों के लिए विशेष तौर पर नशा मुक्ति केन्द्र अजमेर में होना चाहिए। इसके लिए जिला पुलिस की ओर से समाज कल्याण विभाग को पत्र भेजकर अवगत कराया गया है। पिछले दिनों राजस्थान उच्च न्यायालय में रिट याचिका की सुनवाई करते हुए जस्टिस एमएन भंडारी और डीसी सोमानी ने मामले को गंभीर माना और राज्य सरकार को दिशा-निर्देश भी जारी किए थे। इसके तहत बुधवार को जिला पुलिस कार्रवाई का ब्यौरा हाईकोर्ट के समक्ष पेश करेगी। उल्लेखनीय है कि भास्कर ने 21 अप्रैल के अंक में इस बारे में विस्तृत समाचार प्रकाशित कर पुलिस और जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया था।
गोवा के बाद अजमेर में सबसे ज्यादा हैं नशेड़ी बच्चे
देश में गोवा के बाद अजमेर दूसरा शहर है जहां नशे की गिरफ्त में फंसे सबसे ज्यादा बच्चे हैं। उपेक्षित बच्चों के संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्थाओं के सर्वे के मुताबिक शहर में 700 से ज्यादा बच्चे आदतन नशे के आदी पाए गए हैं। गोवा और अजमेर में विदेशी पर्यटकों की आवाजाही रहने के कारण नशे का कारोबार भी पनप रहा है। अजमेर में दरगाह और पुष्कर इलाके में विदेशी पर्यटकों के संपर्क में आने वाले उपेक्षित बच्चे नशे की लत का शिकार हो रहे हैं। यह जानकारी पिछले दिनों संरक्षण में लिए गए नशेड़ी बच्चे ने बयानों में दी है। उसने चौकाने वाला बयान दिया है कि वह विदेशी पर्यटक युवती के साथ पुष्कर में रहा और बाद में उसके साथ हिमाचल भी गया था, इस दौरान नशे की लत का शिकार हो गया। बाद में नशे की लत पूरी करने के लिए वह अपराध के दलदल में भी फंस गया था।
अजमेर में बच्चों के लिए विशेष नशा मुक्ति केंद्र की जरूरत
एसपी राजेन्द्र सिंह चौधरी ने बताया कि बच्चों को नशे से मुक्ति दिलाने के लिए राजस्थान में जोधपुर, गंगानगर, कोटा में दस चाइल्ड नशा मुक्ति केन्द्र स्थापित हैं, लेकिन अजमेर जिले में एक भी केन्द्र नहीं है। नशे की गिरफ्त में फंसे बच्चों को संरक्षण में लेकर इन केन्द्रों में काउंसलिंग और उपचार किया जाता है। उनके आवास और खाने-पीने की आदत में सुधार लाया जाता है। अजमेर में यह सुविधा नहीं है। जिला पुलिस ने समाज कल्याण विभाग को इस बारे में विभागीय स्तर पर पत्र भेजकर नशा मुक्ति केन्द्र स्थापित करने को कहा है। बच्चों के कल्याण के लिए काम करने वाली संस्था चाइल्ड लाइन के काउंसलर रामेश्वर लाल प्रजापति ने बताया कि गोवा के बाद अजमेर में सबसे ज्यादा नशेड़ी बच्चे हैं, संस्था बच्चों को नशे से मुक्ति के लिए संरक्षण में लेकर काउंसलिंग तो करती है, लेकिन अलग से इनके लिए आश्रय गृह नहीं होने से वह दुबारा बुरी आदत का शिकार हो जाते हैं। नशे से मुक्ति दिलाने के लिए बच्चों को अलग से नशा मुक्ति केंद्र और आश्रय स्थल होना चाहिए, ताकि ऐसे बच्चों को चार से छह महीने तक विशेष माहौल में रखा जाए और इन्हें अच्छा भोजन, काउंसलिंग, व्यायाम और योग मुहैया करवा कर इनकी मानसिकता बदली जाए। इस बारे में संस्था की ओर से भी राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा है।
नशे के खिलाफ अभियान में पुलिस ने पकड़े छह भगोड़े नशा तस्कर
हाईकोर्ट की सख्ती का नतीजा है कि जिला पुलिस ने पिछले दो महीने से नशे की गिरफ्त में फंसे बच्चों को संरक्षण में लेने और नशे की बुराइयों के बारे में जागरूकता के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत अब तक बच्चों को नशे की सामग्री मुहैया कराने वाले 35 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया है। एसपी राजेन्द्र सिंह चौधरी के अनुसार अभियान के तहत एनडीपीएस एक्ट में फरार छह आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया है। यह आरोपी मफरूर घोषित थे। एसपी के अनुसार सभी थाना प्रभारियों को अपने-अपने इलाकों में नशे के खिलाफ जन जागरूकता की कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं। जिला पुलिस ने सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर दरगाह इलाके में नुक्कड़ नाटक और रैली निकाल कर नशे के खिलाफ जनजागरण का काम किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि बच्चों के कल्याण के लिए काम करने वाली संस्थाएं चाइल्ड लाइन ने नशे की गिरफ्त में फंसे बच्चों के बारे में विस्तृत सर्वे किया है। इसके अनुसार शहर में सबसे ज्यादा नशेड़ी बच्चे दरगाह इलाके में अंदरकोट, जालियान कब्रिस्तान, डिग्गी, देहली गेट, फव्वारा चौराहा और बजरंगगढ़ के आसपास व रेलवे स्टेशन पर हैं।