शाहनी के लिए अग्रिम जमानत के रास्ते बंद
लैंड फॉर लैंड के मामले में रिश्वत व प्लॉट मांगने के साढ़े चार साल पुराने मामले में यूआईटी के पूर्व अध्यक्ष नरेन शाहनी की याचिका राजस्थान हाईकोर्ट से खारिज हो गई है। अदालत ने माना कि शाहनी की अग्रिम जमानत अर्जी पूर्व में खारिज हो चुकी है और ऐसे में अब उनके सामने कानून के समक्ष समर्पण के अलावा कोई रास्ता नहीं है।
हाईकोर्ट ने शाहनी की याचिका पर गुणावगुण पर कोई टिप्पणी किए बगैर खारिज करते हुए कहा कि विचारण अदालत के समक्ष समर्पण ही रास्ता है। इससे पहले इस मामले में एक अन्य आरोपी मनोज गिदवानी की गिरफ्तारी हो चुकी है। एंटी करप्शन ब्यूरो इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक मामलों की विशेष अदालत में चार्जशीट पेश कर चुका है। एसीबी ने यूआईटी के पूर्व अध्यक्ष नरेन शाहनी भगत सहित बिचौलिए की भूमिका निभाने वाले कारोबारी मनोज गिदवानी को भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश का दोषी माना था वहीं प्रकरण में नामजद एक अन्य आरोपी महेश अग्रवाल को संदेह का लाभ देते हुए क्लीन चिट दे दी थी। एसीबी ने चार्जशीट से पहले शाहनी और गिदवानी को अदालत में हाजिर रहने का नोटिस दिया था लेकिन दोनों ही हाजिर नहीं हुए थे और उनके गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए गए थे। इसके बाद दोनों ने अग्रिम जमानत के लिए प्रयास किए लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली।
यह है शाहनी पर आरोप
शाहनी पर भ्रष्टाचार निराेधक कानून की धारा 7 और गिदवानी पर धारा 8 के साथ ही दोनों पर आपराधिक साजिश रचने के लिए आईपीसी की धारा 120 बी के तहत आरोप हैं। एसीबी की चार्जशीट में लगाए गए आरोपों का दाराेमदार परिवादी अजमत खां की शाहनी और गिदवानी से हुई वार्ता पर है। एसीबी में शिकायत के बाद वायस टेप रिकार्डर में दर्ज हुई वार्ता के आधार पर एसीबी ने माना है कि अजमत खां को उसके द्वारा समर्पित जमीन के एवज में विकसित जमीन के भूखंड देने के लिए 12 लाख रुपए नगद एवं चार-चार सौ गज के दो प्लाट मांगे गए थे।