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मांगे नहीं मानी तो 3 जून से ‘कमल का फूल-हमारी भूल’ के नारे के साथ यात्रा निकालेगा राजपूत समाज

3 वर्ष पहले
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आनंदपाल प्रकरण सहित अन्य मामलों में राज्य सरकार के साथ हुए समझौते को लागू नहीं करने और समाज के पदाधिकारियों को परेशान करने का आरोप लगाते हुए सर्व राजपूत समाज संघर्ष समिति ने राज्य सरकार को चेतावनी दी है कि उपचुनाव में जिस तरह भाजपा की हार ही हुई है, अगर अब भी उनकी मांगों की ओर ध्यान नहीं दिया गया तो आगामी विधानसभा चुनाव में फिर से सबक सिखाएंगे।

पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि सरकार ने अगर समय रहते मांगें नहीं मानीं तो 3 जून के बाद भाजपा हटाओ, राजस्थान बचाओ और कमल का फूल हमारी भूल नारे के साथ स्वाभिमान यात्रा निकाली जाएगी। अजमेर में बुधवार को संघर्ष समिति की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी, जिसमें राजपूत समाज व रावणा राजपूत समाज के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने एक साथ सरकार के खिलाफ वादाखिलाफी का आरोप लगाया।

राजपूत समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि आनंदपाल प्रकरण में उपद्रव एक सोची-समझी साजिश थी, समाज के लोग शांतिपूर्वक बैठे थे, लेकिन रात में कुछ असामाजिक तत्वों ने माहौल बिगाड़ दिया। इस मामले में समाज के पदाधिकारियों को अब भी बेवजह परेशान किया जा रहा है। अगल-अलग थानों से उन्हें नोटिस जारी किया जा रहा है। आनंदपाल के परिवार को आयकर विभाग के नोटिस जारी किए जा रहे हैं।

राजपूत समाज की इण्डोर स्टेडियम में प्रेस वार्ता।

ये रहे मौजूद

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सर्व राजपूत समाज संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष रणजीत सिंह लोसल, राजपूत सभा जयपुर के अध्यक्ष गिरिराज सिंह लोटवाड़ा, प्रवक्ता दुर्ग सिंह खींवसर, राष्ट्रीय करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी, राजस्थान क्षत्रीय महासभा के कार्यवाहक अध्यक्ष जयसिंह राठौड़, जय राजपूताना संघ के अध्यक्ष भंवर सिंह रेटा, बजरंग सिंह रॅायल, चंद्रभान सिंह, राजेंद्र सिंह राठौड़, रणजीत सिंग गेदिया, बलवीर सिंह हाथोज आदि मौजूद थे।

संघर्ष समिति ने ये मुद्दे उठाए

संघर्ष समिति ने कहा कि आनंद पाल प्रकरण में 18 जुलाई को सरकार से हुए समझौते को हूबहू लागू किया जाए। आनंदपाल प्रकरण में ही जिस एफआईआर की जांच पर सहमति बनी थी, सरकार ने उसे छोड़ दो अन्य एफआईआर सीबीआई को जांच के लिए दे दी, जिसे सरकार वापस ले। चतुर सिंह सोढ़ा एनकाउंटर मामले में लंबित सीबीआई जांच शुरू करवाने, आरक्षण की घोषणा करने, कृषक करसा राजपूतों का सर्वे और आरक्षण, सामाजिक संस्थाओं को यूडी टैक्स मुक्त करने, पदमावती फिल्म पूर्णतया बैन करने तथा सामाजिक भावनाओं को आहत करने वाली फिल्म की शूटिंग पर रोक लगाने, सामराऊ प्रकरण के दोषियों की गिरफ्तारी तथा भड़काऊ भाषण देने वालों पर कार्रवाई करने, वर्ष 1947 से आज तक युद्धों में शहीद के परिजनों को परिलाभ देने सहित अन्य मांगें उठाई गई।

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