अजमेर| तीर्थ क्षेत्र नारेली में मुनि सुधासागर महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि संत आचार्य विद्यासागर जैसे गुरु की प्राप्ति हो जाने से कई भक्त संसार सागर से तर जाते है। गुरु शब्द किसी सीमा का मर्यादित रूप नहीं बल्कि यह शब्द अत्यन्त व्यापक है। सभी परमात्मा गुरू में समाहित है।
गुरु की महिमा प्रभु से बढ़कर है इसलिए ही तो प्रभु से पहले गुरु को नमस्कार करने का कहा है। ऐसे तो संसार में बहुत है कि बिना परमात्मा के गुरुता की प्राप्ति हुई है, लेकिन ऐसे इंसान मिलना मुश्किल है जिन्हें बिना गुरुके परमात्मा पद मिला हो। संसार में यह कथन सत्य है कि दुनिया को भगवान ने बनाया हो, लेकिन बात सत्य है कि भगवान को दुनिया में गुरु ने बनाया है।
गुरु के माध्यम से प्रभु भी प्राप्त हो जाते है। गुरू ही संसार की पूरी मां है जो संसार से पार लगाती है, अन्य मां तो संसार में धकेल देती है। शिष्य ऐसा हो जो कहे कि मैं पत्थर हूं यदि गुरु ने तराशा तो भगवान कहलाऊंगा, यदि उनके हाथ से छूटा तो संसार में डूब जाऊंगा। इसलिए गुरु को समर्पण कर आत्मा को परमात्मा बनाओ।