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अवधि विस्तार के मामले में नरम रुख रखने वाले एडीए के कड़े तेवर, पट्‌टे निरस्त करने की तैयारी

3 वर्ष पहले
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अगर आपने नीलामी का कोई प्लाट खरीदा है व कब्जा लिए हुए पांच साल से ज्यादा हो गए हैं और अब तक निर्माण नहीं किया है तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। अब तक ऐसे मामलों में सामान्य रूप से साल दर साल निर्माण समयावधि में विस्तार किया जाता था लेकिन अब अजमेर विकास प्राधिकरण में सदर से लेकर अधिकारियों ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख दिखाते हुए नियम कायदों की समीक्षा शुरू कर दी है। समयावधि में निर्माण नहीं करने पर पट्टा निरस्त करने का अधिकार प्राधिकरण को है।

नीलामी में खरीदे गए प्लाट पर कब्जा लेने की तिथि से तीन साल के भीतर निर्माण किए जाने का प्रावधान है। इस समयावधि के समाप्त होने पर कुछ वर्ष के लिए प्राधिकरण के अध्यक्ष द्वारा अवधि बढ़ाई जा सकती है। इसके बाद राज्य सरकार को ही नगर सुधार न्यास अधिनियम के तहत बने भूमि निस्तारण नियम 1974 के तहत अवधि विस्तार की समयावधि बढ़ाने का क्षेत्राधिकार है। पिछले सालों से लगातार अवधि विस्तार के नियमों को सामान्य रूप से लागू करते हुए समयावधि साल दर साल बढ़ाने के आदेश जारी किए जाते रहे हैं।

इस साल 31 मार्च 2018 को नीलामी के प्लाटों की अवधि विस्तार सीमा समाप्त होने पर योजना शाखा की ओर से हमेशा की तरह समयावधि 31 मार्च 2019 तक बढ़ाने के लिए एडीए अध्यक्ष को फाइल भेजी गई। अध्यक्ष शिवशंकर हेड़ा ने अवधि विस्तार की समयावधि बढ़ाने की मंजूरी देने की बजाए यह पूछा कि कितने ऐसे प्लाट हैं जिन पर निर्माण की समयावधि खत्म हो गई है। इसकी सूची तलब की गई।

योजना शाखा में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है और ना ही आंकड़े रखे जाते हैं कि किस प्लाट पर कितने समय में निर्माण करना जरूरी था और किसकी समयावधि समाप्त हो गई है। योजना शाखा ने हेड़ा को इससे अवगत करवा दिया कि सामान्य रूप से अवधि विस्तार के लिए एक-एक फाइल पर अलग से आदेश नहीं दिया जाता है और सामान्यत: नीलामी में प्लाट खरीदने वाले निर्माण नहीं करते हैं तब तक अवधि विस्तार करवाते रहते हैं और इसके लिए निर्धारित शुल्क भी वसूला जाता है।

सचिव और आयुक्त ने भी उठाए सवाल

एडीए अध्यक्ष से अवधि विस्तार के लिए समयावधि नहीं बढ़ाए जाने व इसके अभाव में निरस्त होने वाले प्लाटों की सूची तलब करने के बाद प्रकरण की फाइल आयुक्त और सचिव को पहुंची। दोनों अधिकारियों ने भी सीधे तौर पर पिछले सालों की तरह अवधि विस्तार के लिए समयावधि बढ़ाने की अनुशंसा की बजाए नियम कायदों को लेकर एक बार फिर योजना शाखा के पाले में गेंद डाल दी।

आयुक्त ने यह पूछा यह सवाल

अवधि विस्तार के तहत समयावधि बढ़ाने के लिए कौन अधिकृत है और नियमों के तहत कितना समय बढ़ा सकते हैं।

इस नियम के तहत होता है अवधि विस्तार

भूमि निष्पादन नियम 1974 के नियम 14(ए) के तहत निर्धारित समयावधि में निर्माण नहीं किए जाने पर नीलामी में बेचे गए के प्लाटों के पट्टे निरस्त करने के अधिकार संबंधित निकाय को होता है। नीलामी में खरीदे गए प्लाट पर तीन साल के भीतर निर्माण करना होता है और पेनल्टी देकर यह अवधि दस साल तक बढ़ाने का प्रावधान है। इसके बाद भी निर्माण नहीं होने पर प्लाट का पट्टा निरस्त किया जा सकता है। इसी तरह नियम 17(6) के तहत आवंटन श्रेणी वाले प्लाटों के अवधि विस्तार के लिए प्रावधान है इसमें संबंधित निकाय के अध्यक्ष और बोर्ड को दो साल के अवधि विस्तार का अधिकार है। अंतिम निर्णय व क्षेत्राधिकार राज्य सरकार को हाेता है जो भूमि निष्पादन नियम 31 के तहत संबंधित निकाय को निर्माण अवधि बढ़ाने के लिए समय-समय पर निर्देश जारी करती है। आम तौर पर सरकार समयावधि बढ़ा देती है ताकि नीलामी में प्लाट लेने वाले निरुत्साहित नहीं हो लेकिन इसके साथ ही अवधि विस्तार के लिए साल दर साल के हिसाब से मोटी पेनल्टी व ब्याज वसूला किया जाता है।

सचिव ने उठाया यह मुद्दा

अवधि विस्तार को लेकर एडीए के बोर्ड या नगरीय विकास विभाग ने पहले क्या निर्णय किए थे उसकी जानकारी और कापी दी जाए।

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