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संसार में प्रत्येक अक्षर मंत्र का कार्य कर सकता है

3 वर्ष पहले
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अजमेर | जिस प्रकार सड़क, सरिता, सूर्य आदि किसी एक के लिए नहीं होते उसी प्रकार ये दिगंबर संत व्यक्तिगत या समाज विशेष के ना होकर प्राणी मात्र के होते हैं, जैन संत न होकर जनसंत होते हैं और सभी के कल्याण की कामना और भावना भाते हुए उद्यमशील रहते हैं। ज्ञानोदय तीर्थ क्षेत्र नारेली में गुरुवार को सुधासागर महाराज ने धर्म सभा कहा कि संसार में वस्तु का उतना महत्व नहीं जितना महत्व उसकी विधि का है। यदि वस्तु के सदुपयोग की विधि मालूम है तो वस्तु का होना सार्थक है और वस्तु भी उसी की होती है जिसके पास विधि है। संसार में प्रत्येक अक्षर मंत्र का कार्य कर सकता है। प्रत्येक वनस्पति औषधि और प्रत्येक मनुष्य किसी न किसी कार्य में योग्य होता है। आवश्यकता है तो पारखी की जो अक्षरों को प्रयोग मंत्र रूप में कर सके, जो कि अनन्त शक्ति के भंडार होते है, जो संसार की प्रत्येक वस्तुत को प्राप्त कराने में सहायक होते हैं।

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