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उचित मूल्य न चुकाने की सोच से जन्म लेता भ्रष्टाचार

3 वर्ष पहले
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अजमेर| पुष्कर रोड स्थित कलापूर्ण सूरि आराधना भवन में जैनाचार्य विजय र|सुंदर सूरि महाराज के शिष्या ‘गणि धैर्यसुंदर विजय महाराज ने प्रवचन में कहा कि जब चीज की आवश्यकता कम लगती है, तब भाव ज्यादा लगते हैं। व्यक्ति चीज की कीमत अदा नहीं करता, चीज के प्रति खुद की इच्छा की कीमत अदा करता है। दान, तप, क्रिया धर्म कठिन लगते है, क्योंकि उसके द्वारा प्राप्त होने वाला सद्गुण, प्रसन्नता, समाधि आवश्यक नहीं है। उन्होंने कहा कि उचित मूल्य न चुकाने की मानसिकता भ्रष्टाचार को जन्म देती है। आपकी दुनिया में 30 करोड़ की जमीन यदि 10 करोड़ रुपए में चाहिए तो उद्योगपति 25-25 लाख की रिश्वत देने के लिए तैयार हो जाता है। यह ही है भ्रष्टाचार।

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