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रामकेश मीणा की हत्या का मास्टरमाइंड वरुण चौधरी प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार

3 वर्ष पहले
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रामकेश मीणा हत्याकांड के मास्टरमाइंड कुख्यात वरुण चौधरी को अलवर गेट थाना पुलिस ने भरतपुर से प्रोडक्शन वारंट के तहत गिरफ्तार कर लिया है।

वरुण चौधरी भरतपुर में फायरिंग की वारदात करने के बाद हमले में घायल होकर पुलिस की गिरफ्त में फंस गया था। मंगलवार को पुलिस टीम उसे लेकर अजमेर पहुंची। थाना प्रभारी हरिपाल सिंह के अनुसार आरोपी के खिलाफ अलवर गेट, क्लाक टावर, सिविल लाइंस और क्रिश्चियन गंज थाना क्षेत्रों में हत्या, जानलेवा हमला और अन्य अापराधिक वारदातों में मुकदमे दर्ज हैं। अलवर गेट थाना पुलिस की ओर से वरुण गैंग से अब तक एक दर्जन फॉयर वेपन सहित अन्य हथियार आैर 300 जिंदा कारतूस बरामद किए जा चुके हैं। कुख्यात बदमाश वरुण चौधरी, रामकेश मीणा हत्याकांड के बाद से फरार था।

अजमेर जिला पुलिस ने इस पर 12 हजार का इनाम घोषित कर रखा था। चौधरी गैंग के 17 गुर्गे पुलिस के हत्थे चढ़ चुके हैं। मालूम हो कि वरुण भरतपुर के कुख्यात बदमाश रहे पुष्पेंद्र जाट व धर्मेंद्र चौधरी के परिवार से है। पुष्पेंद्र को काफी समय पहले दिल्ली पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था, जबकि धर्मेंद्र चौधरी की मीणा गैंग के बदमाशों ने अजमेर में गोली मारकर हत्या कर दी थी। रामकेश हत्याकांड के अलावा वरुण व उसकी गैंग पर कई मुकदमे दर्ज हैं। क्लाक टावर, सिविल लाइंस और क्रिश्चियन गंज थानों में भी वरुण के खिलाफ अापराधिक मामले दर्ज हैं। आरोपी से गैंग के अन्य लोगों के बारे में पूछताछ की जा रही है।

आरोपी वरूण।

गैंगवार की आशंका से एहतियात बरत रही है पुलिस

रामकेश मीणा हत्याकांड को अंजाम देने वाले गिरोह के सरगना वरुण चौधरी ने अपने चाचा धर्मेंद्र चौधरी की हत्या का बदला लेने के लिए वारदात की थी। दोनों गिरोह के लोग एक दूसरे के जानी दुश्मन बने हुए हैं। गैंगवार की आशंका के तहत पुलिस एहतियात के तौर पर सतर्कता बरत रही है। यही कारण था कि वरुण चौधरी को भरतपुर से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अजमेर लाया गया। यहां लाने से पहले ही अलवर गेट थाना पुलिस ने वरुण के विरोधी गुट के पांच लोगों को हिरासत में ले लिया था।

10 हजार से ज्यादा कॉल डिटेल खंगाली

थाना प्रभारी हरिपाल सिंह ने बताया कि जिला पुलिस ने वरुण चौधरी को पकड़ने के लिये तत्कालीन वृत्ताधिकारी मोनिका सेन के नेतृत्व में करीब 10 हजार से ज्यादा मोबाइल फोन नंबरों की कॉल डिटेल खंगाल कर उसकी लोकेशन ट्रेस की थी। वरुण व उसकी गैंग को पकड़ने के लिए राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र में कई बार पुलिस टीमें भेजी गई एवं संबंधित राज्यों की पुलिस एटीएस, एसओजी, स्पेशल क्राइम ब्रांच से लगातार संपर्क बनाए रखा, यही कारण रहा कि वरुण वारदात के बाद से कभी राजस्थान नहीं आया एवं इसके द्वारा चार बार अजमेर में अवैध वसूली के लिए दहशत फैलाने की कोशिश की गई। उसने अपने गिरोह के गुर्गों को हथियार से लैस कर अजमेर भेजा, लेकिन पुलिस की सजगता से 17 लोग पकड़े गए।

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