मृत्युभोज न कर बेटों ने गोशाला में दान की राशि
गोवंश से निस्वार्थ प्रेम की प्रेरणा राठ के लोगों से ली जा सकती है। मोलावास निवासी दो भाइयों ने अपने पिता की मौत के बाद मृत्युभोज नहीं करके गोशाला में गोवंश के लिए 71 हजार रुपए की सहायता की। शुद्ध दिन में आए रिश्तेदार व परिजनों ने भी प्रेरित होकर करीब डेढ़ लाख रुपए गोशाला में सहयोग के लिए भेंट किए। बाबा खेतानाथ गोशाला मुंडनवाड़ाखुर्द में मोलावास निवासी स्वर्गीय सूरजभान यादव का शुद्ध दिन रविवार को मनाया गया। उनके पुत्रों पूर्व सरपंच रतनलाल यादव एवं सुभाष यादव की ओर से गोशाला में गोवंश के लिए सवामणी की गई। सवामणी में 21 मन चारा, पांच मन शक्कर, दस क्विंटल अनाज दलिया एवं 11 हजार रुपए दान स्वरूप गोशाला समिति को प्रदान किए गए। कुल मिलाकर 71 हजार रुपए खर्च हुए।
24 साल पुरानी गोशाला में है तीन हजार गोवंश : करीब 24 साल पहले 1994 बाबा खेतानाथ गोशाला मुंडनवाड़ाखुर्द की स्थापना ग्रामीणों के सहयोग से की गई थी। गोशाला में इन दिनों करीब 3 हजार गोवंश है। गोशाला को पिछले छह साल से सरकार की ओर से साल में तीन महीने का अनुदान ही मिल रहा है।
बदलाव
मुंडनवाड़ाखुर्द स्थित बाबा खेतानाथ गोशाला में पिता की मौत पर बेटों ने किया दान, सामाजिक कुरीति मिटाने का दिया संदेश
मुख्य अतिथि व आयोजकों को सम्मानित करते गोशाला प्रबंधक।
रिश्तेदार भी नहीं रहे पीछे
सूरजभान के परिजनों से प्रेरित होकर रिश्तेदार भी गोशाला में दान देने से पीछे नहीं रहे। पूर्व ग्राम विकास अधिकारी ब्रह्मप्रकाश यादव ने गोमाता सवामणी कार्यक्रम में 71 हजार रुपए खर्च करने की घोषणा की। महेन्द्र कैरियर ट्रांसपोर्ट निदेशक अजीत यादव ने दो ट्रक चारा के लिए राशि एक लाख दो हजार रुपए तथा सिरोड़ खुर्द निवासी जगदीश यादव ने 21 कुर्सी गौशाला प्रबंधन को दान किया। वहीं मौजूद अतिथियों व ग्रामीणों की ओर से 41 हजार रुपए की आर्थिक सहयोग गोशाला समिति को प्राप्त हुआ।
साल में एक माह की पेंशन गोशाला में देता है पुत्र
सूरजभान यादव ने अपने जीवन में सेना में नौकरी की। सेना से रिटायर्ड होने के बाद बैंक में सेवाएं दी। जीवन के अंतिम दिनों में गोवंश से उन्हें विशेष लगाव रहा। उनके पुत्र रतनलाल यादव भी सेना से रिटायर्ड है और हर साल एक महीने की पेंशन गोशाला में दान देते हैं।