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सफाई के लिए 135.24 लाख के ठेके ऐसी फर्म को दिए, जो रजिस्टर्ड ही नहीं

3 वर्ष पहले
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सरकारी अस्पतालों में सफाई के लिए दुगनी से भी अधिक राशि का ठेका दिल्ली की जिस एकमे एंटरप्राइजेज को दिया गया है, उसका रजिस्ट्रेशन ही नहीं है। न ही ठेका शर्तों के आधार पर उस फर्म से रजिस्ट्रेशन के दस्तावेज लिए गए हैं। इसका खुलासा तब हुआ, जब संयुक्त निदेशक ने सफाई ठेके को लेकर पीएमओ को नोटिस जारी किया। नियमानुसार सफाई कार्य के लिए टेंडर रजिस्टर्ड एकल स्वामित्व वाली कंपनी, संस्था या एनजीओ को दी जानी चाहिए। इसके प्रमाणित दस्तावेज टेंडर खुलने के बाद कार्यादेश के समय लेना आवश्यक है, लेकिन इस संस्था के पास रजिस्ट्रार संस्थानों से रजिस्टर्ड संस्था और प्लेसमेंट एजेंसी के दस्तावेज ही नहीं थे। जबकि रजिस्टर्ड संस्था का टेंडर ही मान्य किया जाना था। जिला अस्पताल के पीएमओ कार्यालय से ऐसी संस्था का एकल टेंडर मान्य कर 135.24 लाख रुपए के सफाई के दो ठेका दे दिए गए। अस्पताल प्रशासन ने वाणिज्यकर विभाग से दुकान एवं वाणिज्य संस्थान अधिनियम 1958 संस्थान का पंजीयन प्रमाण पत्र ही स्वीकृत कर लिया। यह रजिस्ट्रेशन भी 30 दिसंबर 2017 तक ही वैध था। इस पर भी संयुक्त निदेशक डॉ. केके शर्मा ने नियमों का हवाला देकर जवाब मांगा है।

जब बढ़ी राशि की अनुमति नहीं मिली तो अपरिहार्य कारणों से निरस्त बता दिया

संयुक्त निदेशक ने पहली बार पांच लाख और दूसरी बार दस लाख की बढ़ी दरों पर टेंडर की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। जब अनुमति नहीं मिली तो 11 अक्टूबर 2017 को पीएमओ कक्ष में आयोजित बैठक में सफाई के टेंडर को निरस्त कर दिया गया। इसे रिकार्ड में अपरिहार्य कारणों से निरस्त होना बताया गया।

एक लाख रुपए प्रति महीने के बजट का भी हिसाब पूछा

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की आेर से जिला अस्पताल और डिलीवरी पॉइंट के लिए 5 मई 2016 के आदेशानुसार हर महीने एक लाख रुपए का बजट दिया जा रहा है। इसमें हर महीने 15 कर्मचारी रखने का प्रावधान है। इसके बावजूद सामान्य अस्पताल की सफाई के लिए 6.12 लाख रुपए और महिला अस्पताल में 5.15 लाख रुपए प्रति महीने सफाई का ठेका का नियम विरुद्ध दिया गया है। इसमें भी संयुक्त निदेशक ने पीएमओ से जवाब मांगा है कि दोनों अस्पतालों में सफाई के लिए ठेका पर 100 कर्मचारी किस नियम के तहत लगाए गए हैं।

बायोमैट्रिक की जगह सफाई कर्मियों की रजिस्टर में हाजिरी : महिला अस्पताल के सफाई कर्मियों का आरोप है कि सफाई ठेकेदार की आेर से 25 से 30 कर्मचारियों से सफाई कराने के बाद 45 की उपस्थिति दर्ज की जा रही है। इसी कारण सफाई कर्मियों की उपस्थिति बायोमैट्रिक मशीन की जगह रजिस्टर में दर्ज की जा रही है, जबकि राजीव गांधी सामान्य अस्पताल में 55 सफाई कर्मियों की उपस्थिति बायोमैट्रिक मशीन से हो रही है।

सामान्य अस्पताल में सभी सफाई कर्मियों की बायोमैट्रिक मशीन से हाजिरी हो रही है, लेकिन महिला अस्पताल में अभी रजिस्टर में ही उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं। यहां 45 से भी अधिक कर्मचारी काम कर रहे हैं। कोई गड़बड़ी नहीं है।अब शीघ्र ही बायोमैट्रिक से उपस्थिति दर्ज कराएंगे। - सुरेन्द्र कुमार, सुपरवाइजर एकमे इंटरप्राइजेज

घोटाले की शिकायत सरकार तक पहुंची, कल तक साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश

सफाई ठेकों में घोटाले की आशंका की शिकायत सरकार तक पहुंच गई है। जिला अस्पताल प्रशासन की ओर से दुगनी से भी अधिक राशि के ठेका देने के मामले में संयुक्त निदेशक डॉ. केके शर्मा ने पीएमओ से जवाब मांगते हुए इसकी शिकायत विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव वीनू गुप्ता, निदेशक डॉ. वीके माथुर एवं कलेक्टर से की है। वहीं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के वित्तीय सलाहकार को शीघ्र जांच कराने के निर्देश दिए हैं, जिससे गड़बड़ी की तुरंत जांच कर कार्रवाई की जा सके। संयुक्त निदेशक ने पीएमओ से 16 बिंदुओं पर तथ्यात्मक रिपोर्ट के साथ उन्हें व सहायक लेखाधिकारी को 23 मई को कार्यालय में उपस्थित होकर बयान व साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं

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