अलवर | श्री भागवत कथ सेवा समिति की ओर से राजर्षि अभय समाज में सोमवार को दूसरे दिन भागवत कथा का आयोजन किया गया। कथावाचक स्वामी कुरेशाचार्य महाराज ने हरिकथा का अर्थ समझाया। उन्होंने कहा कि भागवत ही हरिकथा है। हरिकथा से ही मोह दूर होता है। मोह दूर हुए बिना भगवान से मिलन असंभव है। भगवान की कथा से मोह जकड़ता है। भगवान की बाल लीला को देखकर काकमुशुण्डि को मोह हो गया। विवाह लीला में ब्रह्मा जी को और रामलीला में गरुढ़ को मोह हो गया। लेकिन भागवत कथा मानव मोह से दूर करती है।