भगवान चौधरी. जयपुर | एक ओर हर गांव और घर तक बिजली पहुंचाने की बात हो रही है, लेकिन हमारा बिजली सप्लाई तंत्र ऐसा लापरवाह है कि वह हर साल 500 से ज्यादा लोगों को मौत का करंट दे रहा है। ट्रांसफाॅर्मर में आग लगने, ट्रांसफाॅर्मर फटने, बिजली का तार टूटने जैसी तमाम दुर्घटनाएं हर रोज प्रदेश के किसी न किसी हिस्से में हो रही हैं। बीते चार साल में ऐसे 3,715 हादसे हुए हैं और 2,158 लोग करंट से जान गंवा चुके हैं। मरने वालों में 223 तो विद्युत वितरण निगमों के ही कर्मचारी ही हैं। प्रदेश में हर रोज औसतन 3 बिजली हादसे हो रहे हैं। सबसे ज्यादा हादसे गर्मियों और आंधी-बरसात में होते हैं। हर बड़े हादसे के बाद जांच होती है, सिस्टम सुधारने की बात होती है, लेकिन बदलता कुछ नहीं। हाल ही जयपुर के हरमाड़ा इलाके में घर के आंगन में बैठी छात्रा पर 11 हजार केवी लाइन का तार गिरने की घटना के बाद भास्कर ने बिजली हादसों के आंकड़ों की पड़ताल की तो सामने आया कि अकेले जयपुर डिस्कॉम में ही बीते चार साल में 71 विद्युतकर्मियों समेत 831 लोगों की बिजली हादसों में मौत हुई है। राज्य में तीन डिस्कॉम हैं, जिनमें सबसे ज्यादा मौतें और हादसे अजमेर डिस्कॉम में हुए हैं। अजमेर डिस्कॉम में चार साल में 69 विद्युतकर्मियों और 889 आमजन की मौत हुई है। वहीं जोधपुर डिस्कॉम में 369 लोगों की मौत हुई। सबसे ज्यादा 83 विद्युतकर्मी जोधपुर में ही बिजली दुर्घटनाओं में मौत का शिकार हुए।
बिजली की नई लाइनों के काम को बढ़ाने से ज्यादा जरूरी पुरानी लाइनों की मेंटिनेंस है। फीडर मेंटिनेंस प्रोग्राम के जरिए तारों को टाइट करना, टेड़े-मेढ़े पोल को सही करना, मिड स्पान पोल का काम करना, फीडर छोटा करना, पेड़-पौधों की छंटाई करना और गार्डनिंग करना सहित कई काम है। लेकिन ठेकेदारों द्वारा किए जाने वाले इन कार्यों की मॉनीटरिंग नहीं होती है। -अर्जुन राज मोहनोत, सेवानिवृत्त, उपमुख्य अभियंता
ये हैं प्रदेश में मौत के शॉकिंग आंकड़े
जयपुर डिस्कॉम
1
बिजली हादसों को रोकने के लिए कई कदम उठा रहे है। अधिकारियों व कर्मचारियों को ट्रेनिंग, फीडर इम्प्रूूवमेंट प्रोग्राम, पुरानी लाइनों को ठीक करवाना और हाईरेज पॉइंट्स को आइडेंटिफाई करके ठीक करवाना। बिजली लाइनों का नेटवर्क बढ़ा है आबादी भी बढ़ी है। हादसे नहीं बढ़ने चाहिए। -संजय मल्होत्रा, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक , राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम
कर्मचारी
मृतक 71
घायल 137
आमजन
आमजन
आमजन
मृतक 760
मृतक 760
मृतक 760
घायल 280
घायल 280
घायल 280
जयपुर डिस्कॉम में हर साल बढ़ रहा मौत का आंकड़ा : जयपुर डिस्कॉम के अंडर 12 जिले जयपुर, दौसा, अलवर, भरतपुर, कोटा, झालावाड़, सवाईमाधोपुर, बूंदी, बारांं , करौली, धौलपुर और टोंक आते हैं। जयपुर डिस्कॉम क्षेत्र में पिछले दो सालों में बिजली हादसों में बड़ी बढ़ोतरी हुई है।
हादसे 1248
हादसे 1248
हादसे 1248
कुल
कुल
कुल
मुआवजा 26.12 करोड़
मुआवजा 26.12 करोड़
मुआवजा 26.12 करोड़