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ऐसा सिस्टम विकसित करें, जिसमें निबंधात्मक सवालों की भी जांच हो सके

3 वर्ष पहले
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अलवर | एलआईईटी कॉलेज में कम्प्यूटर तकनीकी विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय कोटा के कुलपति प्रो. डाॅ. एनपी कौशिक और विशिष्ट अतिथि वाइस चांसलर प्रो. डाॅ. राजीव गुप्ता ने किया। मुख्य अतिथि प्रो. कौशिक ने छात्रों के लिए एक अनुसंधान विषय देते हुए कहा कि जिस तरह वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का मूल्यांकन कंप्यूटर द्वारा बिना मानव निगरानी के भी संभव हैं, उसी तरह प्रकार वर्णनात्मक प्रश्नों का भी मूल्यांकन संभव होना चाहिए। इसके लिए छात्रों को अनुसंधान कर ऐसा सिस्टम बनाना चाहिए। प्रो. डाॅ. राजीव गुप्ता ने कहा कि किताबें ज्ञान का सागर हैं, छात्रों को अपने विषय की किताबों के अलावा धार्मिक और अनुसंधान के योग्य पुरातन शिलालेखों में भी रुचि लेनी चाहिए। साथ ही सामजिक समस्याओं को सुलझाने के लिए तकनीकी के विकास में भागीदारी करनी चाहिए। कार्यक्रम में प्रो. अहमद मोहम्मद अजीज ने वायरलैस सेंसर नेटवर्क के उपयोग में आने वाली समस्या, प्रो. आदि सलेम ने वायरलैस मल्टीमीडिया सेंसर नेटवर्क के उपयोग और उसमें आने वाली चुनौतियों, प्रो. डाॅ. तारिक मोहम्मद ने इंटरनेट में आने वाली सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों, प्रो. डाॅ. देवेश बंदिल ने साइबर सिक्युरिटी, प्रो. डाॅ. संजय भारद्वाज ने तकनीक के गलत उपयोग पर चिंता जताते हुए विचार रखे। कार्यक्रम में चेयरमैन मनोज चाचान व ग्रुप निदेशक डॉ. राजेश भारद्वाज भी मौजूद रहे।

जेएनयू में कंप्यूटर साइंस के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डाॅ.डी.के. लोबियाल ने प्राकृतिक भाषा के प्रसंस्करण के क्षेत्र में अनुसंधान पर कहा कि हम कंप्यूटर को मानव भाषा में बातचीत सिखा सकते हैं, जिससे वह एक से ज्यादा भाषाओं को समझकर उस पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकता हैं।

मलेशिया से आए प्रो. डाॅ. आमिर अक्रमिन ने वस्तुओं के इंटरनेट के बारे में बताया कि वह किस प्रकार हमारे दैनिक जीवन में उपयोगी हैं। उन्होंने इनके उपयोग में आने वाली बाधाओं का निदान का तरीका भी बताया।

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