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ब्लड बैंक में 16 दिन से रक्त नहीं, अस्पताल से प्रसूता को परिजन ले गए तो मची खलबली
बहरोड़| राजकीय रैफरल अस्पताल में 15 दिन से ब्लड स्टोरेज यूनिट बंद है और इमरजेंसी में भी रक्त नहीं मिल रहा। बुधवार शाम एक प्रसूता को रक्त नहीं मिलने पर गंभीर हालत देख परिजन उसे बिना बताए अस्पताल से लेकर चले गए। पता चलने पर अस्पताल प्रबंधन में खलबली मच गई और नायसराना निवासी प्रसूता रिंकू लुहार को पुराने स्टेंड से वापिस बुलाकर 108 एम्बुलेंस से रैफर किया गया। जानकारी के अनुसार प्रसूता रिंकू को परिजन बुधवार शाम डिलीवरी के लिए रैफरल अस्पताल पहुंचे। महिला एवं प्रसूता रोग विशेषज्ञ डॉ बी.एस. गुर्जर ने जांच के दौरान ब्लड कम हाेने से दो यूनिट ब्लड के तत्काल इंतजाम के लिए कह दिया। उन्हें अस्पताल में ब्लड सुविधा नहीं होने के बारे में भी बताया गया। परेशान परिजन ब्लड लेने के लिए निजी अस्पतालों के चक्कर लगाते रहे। जहां उनसे ढाई हजार रुपए मांगे गए। गरीब परिवार से होने के कारण परिजन वापिस खाली हाथ सरकारी अस्पताल आए और प्रसूता को लेकर चले गए। यह मामला सोशल मीडिया पर आया और अस्पताल प्रबंधन की खिंचाई होने लगी तो अफसरों के हाथ-पांव फूल गए। प्रसूता वार्ड आैर अस्पताल में बगैर बताए चले जाने की सूचना आरसीएचओ को दी गई। जिस पर आरसीएचओ ने प्रसूता को अलवर भेजने के निर्देश दिए।
बड़ा सवाल : प्रभारी को पता क्यों नहीं
अस्पताल में ब्लड स्टोरेज यूनिट प्रभारी डॉ प्रियंका यादव को नियुक्त किया हुआ है। उनका कहना है कि 2 मई काे अंधड़ के बाद बिजली नहीं हाेने से ब्लड यूनिट में बिजली सप्लाई बंद हाेने से ब्लड नहीं मंगाया गया। वहीं अस्पताल प्रभारी डॉ सुरेश यादव ने कहा कि अस्पताल में 3 मई काे बिजली सप्लाई ठीक हो गई थी। लेकिन ब्लड नहीं हाेने की जानकारी उन्हें नहीं मिली। सबसे बड़ा सवाल है कि ब्लड स्टोरेज प्रभारी को बिजली सप्लाई दुरुस्त होने की जानकारी क्यों नहीं है।