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जिले में स्वाइन फ्लू से अब तक 5 की मौत, तीन महीने में 45 मरीज मिले

3 वर्ष पहले
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जिले में बेमौसम स्वाइन फ्लू के रोगी सामने आ रहे हैं। इस साल 3 महीने में 45 स्वाइन फ्लू के मरीज चिह्नित किए गए हैं, जबकि 5 जनों की मौत हो चुकी है। प्रदेश में स्वाइन फ्लू के रोगियों में अलवर 5वें स्थान पर है। यहां अंतिम रोगी 29 मार्च को भवानी तोप चौराहा निवासी कोमल (24) प|ी फूलचंद सैनी को चिह्नित किया गया। स्वाइन फ्लू का खतरा अभी टला नहीं है। ओले और बारिश से मौसम में ठंडक के बाद इन दिनों स्वाइन फ्लू का वायरस तेजी से सक्रिय हो सकता है, लेकिन जांच की सुविधा जिला मुख्यालय पर उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को संदिग्ध मानकर ही इलाज किया जा रहा है। जिला मुख्यालय पर जांच के लिए सैंपल तो निशुल्क लिए जा रहे हैं, लेकिन जांच रिपोर्ट की देरी स्वाइन फ्लू के मरीजों पर खतरा बढ़ा रही है। जांच रिपोर्ट 4-5 दिन में आ रही है। अस्पताल प्रशासन यह व्यवस्था अभी तक नहीं सुधार पाया है। डॉक्टरों का मानना है कि स्वाइन फ्लू का मिशिगन स्टेन वायरस अब किसी भी मौसम में सक्रिय हो रहा है। एेसे में लक्षण सामने आने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेने की जरूरत है। वायरस से बचाव के लिए बाजार में टीका भी उपलब्ध है।

जलभराव वाले स्थानों पर मच्छर पनप रहे हैं। जोहड़ व कंस्ट्रक्शन वाले स्थानों पर लंबे समय तक पानी भरा रहता है। ऐसी जगह मच्छर पनपने से पॉजिटिव केस जल्दी सामने आ रहे हैं। नगर परिषद को लार्वानाशी घोल डालने और जलभराव वाले गड्ढों को भरने के लिए पत्र लिखा है। कई बार पुराने केस भी एंटी बॉडी के कारण पॉजिटिव आ जाते हैं। वहीं मौसम में बदलाव के कारण स्वाइन फ्लू का वायरस सक्रिय हो रहा है। -डॉ. छबील कुमार, डिप्टी सीएमएचओ (स्वास्थ्य), अलवर

बारिश से पहले ही डेंगू, स्क्रब टाइफस और चिकनगुनिया की दस्तक
जिले में बारिश के मौसम से पहले ही पनपे मच्छरों के कारण डेंगू, स्क्रब टाइफस और चिकनगुनिया ने दस्तक दे दी है। तीन महीने में यहां डेंगू के 45, स्क्रब टाइफस के 5, चिकनगुनिया के 2 और मलेरिया के 3 मरीज सामने आ चुके हैं। ये सरकारी आंकड़े हैं, जबकि निजी अस्पतालों में इनसे कई गुना मरीज पहुंचे हैं। मच्छर जनित इन बीमारियों के मरीज सामने आने के बाद चिकित्सा विभाग ने स्वास्थ्य दल आपके द्वार अभियान चलाया, लेकिन यह अभियान कागजी खानापूर्ति में सिमट गया। इसमें न तो शहर, कस्बे और गांवों में मच्छरों को नष्ट करने के उपाय किए और न ही मरीजों तक दवाएं पहुंची। शहर में नगर परिषद इस अभियान में शामिल नहीं हुआ और अधिकारियों ने रुचि नहीं दिखाई। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की यही खानापूर्ति आगामी मौसम में खतरनाक साबित हो सकती है।

मच्छर जनित बीमारियों से बचाव के उपाय
घरों के पास गड्ढों, नालियों, टंकियों, गमलों और टायरों में पानी एकत्र नहीं होने दें।

घरों में पानी की टंकियों, खेलियों, परिंडे आदि को सप्ताह में एक बार खाली करें और सुखाकर फिर पानी भरें।

जोहड़, फव्वारे, बावड़ी, तालाब आदि में लार्वानाशी घोल का छिड़काव करें या लार्वा भक्षी मछलियां छोड़ें।

दरवाजों पर जालीदार गेट लगवाएं और शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें।

बिना चप्पल या जूते पहने बगीचे, खेत और जंगल में न घूमें।

बीमार होने पर डॉक्टर से परामर्श लें, नीमहकीमों के चक्कर में न पड़ें।

स्वाइन फ्लू का मिशिगन स्टेन वायरस सक्रिय
स्वाइन फ्लू का वायरस कैलिफोर्निया से अब मिशिगन स्टेन में तब्दील हो चुका है, जो हर मौसम में सक्रिय होता है। तेज बुखार, जुकाम में नाक बहना, तेज सिरदर्द और गले में दर्द होना स्वाइन फ्लू के लक्षण हैं। ऐसे रोगियों को खांसते व छींकते समय नाक व मुंह पर रुमाल रखना चाहिए और सार्वजनिक स्थान पर जाने से बचना चाहिए।

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