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टेलीमेडिसन सेवा के ऑनलाइन परामर्श की पर्ची पर नहीं मिल रही निशुल्क दवा

3 वर्ष पहले
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राजीव गांधी सामान्य अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए संचालित टेलीमेडिसन सेवा दुविधा बन गई हैै। जयपुर से ऑनलाइन परामर्श लेने वाले मरीजों के पर्चे पर निशुल्क दवाएं नहीं मिल रही हैं। परामर्श के बाद ऑनलाइन आने वाले सरकारी पर्चे पर लिखी दवाएं फिर से अस्पताल के पर्चे पर लिखनी पड़ रही हैं। अस्पताल के पर्चे पर नर्सिंगकर्मी द्वारा लिखी दवाओं पर डॉक्टर की मुहर लगवाने के लिए मरीजों को भटकना पड़ रहा है। शुरुआत में तो कुछ ऑनलाइन पर्चों पर दवा दी गई, लेकिन बाद में ऑनलाइन एंट्री नहीं होने के कारण दवा देने से इनकार कर दिया गया। अस्पताल प्रशासन इस समस्या का साढ़े दस महीने में भी निराकरण नहीं कर सका है। सामान्य अस्पताल में रैफर होने वाले मरीजों का स्थानीय स्तर पर ही इलाज करने के लिए जुलाई 2017 में टेलीमेडिसन सेवा शुरू की गई थी, लेकिन अभी तक कोई डॉक्टर ऑनलाइन परामर्श के लिए मरीज लेकर नहीं पहुंचा है। टेलीमेडिसन सेवा में कार्यरत एकमात्र नर्सिंगकर्मी मरीजों को ऑनलाइन परामर्श दिला रहा है। डॉक्टर इस सेवा से परामर्श लेने में रुचि नहीं ले रहे हैं। एकमात्र नर्सिंगकर्मी अपने बूते पिछले साल छह महीने में 259 और इस साल साढ़े चार महीने में 320 मरीजों को जयपुर के विशेषज्ञ डॉक्टरों से ऑनलाइन परामर्श दिला चुका है। जयपुर रैफर होने वाले मरीजों को जिला अस्पताल में ही रोकने के लिए टेलीमेडिसन सेवा शुरू की गई, जिससे भर्ती मरीज को रैफर करने से पहले ऑनलाइन सेवा के जरिए सुपर स्पेशलिस्ट से परामर्श ले सकें, लेकिन जिला अस्पताल में अभी तक एक भी भर्ती मरीज को सुपर स्पेशियलिटी परामर्श नहीं मिला है क्योंकि इसमें डॉक्टर का होना जरूरी है और वे इसमें रुचि नहीं ले रहे। इसी कारण टेलीमेडिसन में अभी तक ओपीडी के ही 579 मरीजों को परामर्श मिल सका है।

एक ही कर्मचारी की जिम्मेदारी, छुट्टी जाने पर लग जाता है ताला : टेलीमेडिसन सेवा की एक ही नर्सिंग कर्मचारी को जिम्मेदारी सौंपी हुई है। इस कर्मचारी के छुट्टी जाने पर इस सेवा पर ताला लगा रहता है। कई बार तो बाहर से आने वाले पहले परामर्श ले चुके मरीजों का फॉलोअप नहीं हो पाता। यहां कार्यरत कर्मचारी की जरूरत पड़ने पर नेत्र विभाग के ऑपरेशन थिएटर में भी ड्यूटी लगा दी जाती है।

मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना में मरीज की दवा की ऑनलाइन एंट्री डॉक्टरों के नाम से होती है। उसमें हॉस्पिटल के डॉक्टरों के ही नाम दर्ज हैं। ऑनलाइन परामर्श की दवा की एंट्री उसमें नहीं होने के कारण अस्पताल के पर्चे पर दवा लिखनी पड़ती है। डॉक्टर टेलीमेडिसन सेवा में रुचि लें तो मरीज को भी भटकने की जरूरत नहीं होगी, लेकिन ओपीडी में रोगी अधिक होने के कारण डॉक्टर टेलीमेडिसन तक नहीं पहुंच पाते हैं। - डॉ. भगवान सहाय, पीएमओ जिला अस्पताल

जिला अस्पताल के टेलीमेडिसन सेंटर में मरीज का ऑनलाइन चिकित्सा परामर्श देते नर्सिंगकर्मी।

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