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शादी-विवाह, कांफ्रेंस व व्यापार के लिए भी कोई अलवर आया तो उसे पर्यटक मान लिया

3 वर्ष पहले
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जिले में पर्यटन उद्योग की अपार संभावना होने के बावजूद सरकार की ओर से इसे बढ़ावा देने के लिए ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे। जो योजनाएं बनाई गई, वे शुरू नहीं हो सकी और जो शुरू हुई, वे कुछ समय बंद कर दी गईं। इसके चलते पर्यटकों की संख्या में कमी आई है। जिले में पिछले पांच साल में 15 हजार 337 पर्यटक कम आए। देशी पर्यटकों की संख्या में 11 हजार 821 व विदेशी पर्यटकों की संख्या में 3516 की कमी आई है।

साल 2012 में जिले में 2 लाख 38 हजार 619 पर्यटक आए थे। इनमें देशी पर्यटकों की संख्या 2 लाख 23 हजार 240 जबकि विदेशी पर्यटकों की संख्या 15 हजार 379 थी। साल 2017 में पर्यटकों की संख्या घटकर 2 लाख 23 हजार 282 रह गई। इनमें देशी पर्यटक 2 लाख 11 हजार 419 जबकि विदेशी पर्यटक 9 हजार 37 थे।

पर्यटन उद्योग को बढ़ाने के लिए अमेजिंग अलवर नाम से फेसबुक पेज बना रखा है। जिसमें अलवर टूरिज्म से जुड़ी विभिन्न जानकारी उपलब्ध हैं। मत्स्य उत्सव व राजस्थान दिवस पर सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। पर्यटन नीति 2015 के तहत पर्यटन उद्योग बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर विशेष जोर है। टीना यादव, सहायक निदेशक पर्यटन विभाग अलवर

विभाग की नजर में ये भी पर्यटक

जिले में आने वाले पर्यटकों की संख्या में वे लोग भी शामिल हैं जो किसी भी काम से अलवर आए और होटल और धर्मशालाओं में रुके। ऐसे में सवाल उठता है कि होटल या धर्मशाला में आकर रुकने वाला हर व्यक्ति पर्यटक कैसे हो सकता है? पर्यटन विभाग की नजर में पर्यटक की परिभाषा अलग है। केवल घूमने आने वाले ही पर्यटक की श्रेणी में नहीं आते बल्कि कारोबार के सिलसिले में आने वाला हर व्यवसायी व उद्यमी जो होटल या धर्मशाला में आकर ठहरा, वह विभाग की नजर में पर्यटक है। बाहर से आकर कोई यहां शादी समारोह का आयोजन करता है, होटल या धर्मशाला में कान्फ्रेंस या मीटिंग के लिए कोई आता है, वह भी पर्यटक है। यहां लगने वाली प्रदर्शनी भी ट्यूरिस्ट की श्रेणी में शामिल है। इन्हें क्रमश कॉरपोरेट, वेडिंग, कान्फ्रेंस/ मीटिंग ट्यूरिस्ट की श्रेणी में डाला गया है। इसके अलावा बाइक, कारवां व मेडिकल ट्यूरिस्ट है। विभाग का मानना है कि यहां मेडिकल ट्यूरिस्ट को छोड़कर अन्य सभी प्रकार का टूरिज्म है।

साल देशी पर्यटक विदेशी पर्यटक कुल पर्यटक

2012 223240 15379 238619

2013 164682 12105 176787

2014 199161 19301 218462

2015 196190 11234 207424

2016 197291 9037 206328

2017 211419 11863 223282

(पर्यटन विभाग के अनुसार पर्यटकों की संख्या)

मूसी महारानी की छतरी

पर्यटकों की संख्या घटने के दो कारण

जिले के पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिलती।

पर्यटन उद्योग को बढ़ाने के लिए बनी योजनाएं कई साल बाद भी शुरू नहीं सकी। जो शुरू हुई वे कुछ दिन बाद बंद हो गई।

अलवर जिले में यहां आते हैं पर्यटक

सबसे अधिक पर्यटक सरिस्का, सिलीसेढ़, भानगढ़, म्यूजियम, पांडूपोल जाना व बाला किला में सफारी का आनंद उठाना पसंद करते हैं।

ये योजनाएं हुई फेल

मूसी महारानी की छतरी से लेकर बाला किला तक रोप वे नहीं बना। मूसी महारानी की छतरी पर कैफेटेरिया व सोविनियर शॉप भी शुरू नहीं हुई। पर्यटकों के लिए शहर में भ्रमण के लिए साइकिल योजना शुरू होने के बाद ही फेल हो गई। पेइंग गेस्ट योजना भी फेल हो गई। जिले में करीब 8 पेइंग गेस्ट हैं।

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ये हैं नई योजनाएं

प्रतापबंध के पास स्थित बायो डायवर्सिटी पार्क, म्यूजियम को नए सिरे से संवारना

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