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परीक्षा केन्द्रों में प्रश्नपत्र व उत्तरपुस्तिका हाथ में लेकर बैठे रहे विद्यार्थी क्योंकि पूरे साल नहीं आई थी किताबें
मंगलवार को जिले में जिला समान परीक्षा के तहत नवीं कक्षा का आईटी का पेपर था। इस परीक्षा के दौरान अधिकतर विद्यार्थी हाथ में प्रश्न पत्र और उत्तरपुस्तिका लेकर बैठे रहे क्योंकि विद्यार्थियों के पास पूरे साल किताबें ही नहीं थीं। ऐसे में वे पढ़ाई कैसे करते। इस कारण यह परीक्षा देना जहां बच्चों के लिए मुसीबत बन गया, वहीं सरकारी सिस्टम के लिए खानापूर्ति। यह हाल अलवर जिले का ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश का है। जिले में कंप्यूटर विषय स्कूलों में दो तरीके से पढ़ाया जाता है। जिले के 26 स्कूलों में कंप्यूटर विषय और हैल्थ केयर वोकेशनल के रूप में है। इन स्कूलों में एजेंसियों की ओर से अस्थायी तौर पर कंप्यूटर अनुदेशक लगे हुए हैं और पढ़ाई भी हो जाती है लेकिन अन्य स्कूलों में नवीं कक्षा में कंप्यूटर और 11वीं में जीवन कौशल अनिवार्य विषय के रूप में है। हालात इन्हीं स्कूलों में खराब हैं। इन स्कूलों में कई सालों से न तो कंप्यूटर की और न ही जीवन कौशल की पुस्तकें उपलब्ध हैं। स्कूलों से लगातार प्रत्येक वर्ष इसकी मांग जाती रहती है, लेकिन पुस्तकें उपलब्ध नहीं कराई जाती। दूसरी समस्या इन स्कूलों में शिक्षकों की है।
कंप्यूटर को अनिवार्य विषय के रूप में तो जोड़ दिया गया, लेकिन कभी भी कंप्यूटर अनुदेशक या कंप्यूटर शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई। इसकी पूर्ति के लिए स्कूलों में अन्य विषय के शिक्षकों को कंप्यूटर कालांश में भेज दिया जाता है, जबकि कंप्यूटर विषय तकनीकी शिक्षा के तहत आता है। इसे अन्य विषय का अध्यापक कैसे पढ़ा सकता है। यह इतना आसान नहीं होता लेकिन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शिक्षकों को प्रशिक्षण देकर पढ़ाने के लिए भेजा जाता है।