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तीये की रस्म से पहले रामस्वरूप घर लौटा जिंदा देख चौंके ग्रामीण, घर में छाई खुशी
जिसे अपने परिवार का सदस्य समझकर अंतिम संस्कार कर दिया वह तीये की रस्म से पहले ही घर लौट आया तो परिवार वालों का मातम खुशी में बदल गया। दरअसल बिजली घर चौराहे के पास नाले में 27 दिन पहले एक व्यक्ति मृत मिला था। उसकी पहचान रामस्वरूप जाटव निवासी झाडोली के रूप में हुई, इस कारण परिवार वाले उसके शव को ले गए और गरीब होने के कारण लोगों से पैसा एकत्रित कर उसका अंतिम संस्कार कर दिया। दूसरे दिन ही वह घर पर लौट आया तो परिवार में भी खुशियां लौट आई।
वाक्या इस प्रकार है कि 22 मार्च सुबह बिजली घर सर्किल के पास नाले में एक अज्ञात व्यक्ति मृत पड़ा मिला था। पुलिस ने मृतक के शव को अपने कब्जे लिया और शिनाख्ती के लिए उसे राजीव गांधी सामान्य अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया था। घटना के दूसरे सदर थाना क्षेत्र के गांव झाड़ोली निवासी मनीष पुत्र लल्लूराम जाटव सहित उसके साथ कुछ ग्रामीण अस्पताल पहुंचे और मोर्चरी में रखे अज्ञात शव को उन्होंने देखकर उसकी पहचान रामस्वरूप पुत्र लल्लू राम जाटव में रूप की। इस के बाद शव उसके छोटे भाई मनीष जाटव को शव सुपुर्द कर दिया। इसके बाद परिजन शव को गांव झाड़ोली ले गए और उसका सामाजिक रीति-रिवाज के साथ दाहसंस्कार दिया। मगर, तीये से पहले ही रामस्वरूप घर लौट आया। जिसे देखकर ग्रामीण हतप्रभ हो गए और घर में छाया मातम खुशी में बदल गया। रामस्वरूप के जिंदा होने पर पंचायत समिति सदस्य जल्ला राम जाटव ने इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस अब पूरे मामले की जांच में जुटने के साथ नाले में मिले पड़े मिले अज्ञात मृतक की पहचान के प्रयास कर रही है।
ग्रामीणों ने चंदा उगाही कर किया था दाह-संस्कार
ग्रामीणों ने अज्ञात मृत मिले व्यक्ति को रामस्वरूप जानकर दाह संस्कार कर दिया था। मगर, भाई मनीष की आर्थिक स्थिति खराब होने के चलते ग्रामीणों ने रामस्वरूप के दाहसंस्कार के लिए चंदा उगाई की। चंदे में 2500 रुपए एकत्र हुए। इस राशि में से 1800 रुपए मृतक के शव को अलवर से गांव ले जाने के साथ दाहसंस्कार में खर्च कर दिए। जबकि 700 रुपए उसके तीये की रस्म के लिए बचाकर रखे थे। लेकिन उससे पहले ही घटना का खुलासा हो गया। गौरतलब है कि रामस्वरूप दो भाई है। जबकि छोटा भाई मनीष गांव में रहता है। जो अविवाहित है। उसके माता-पिता का कई साल पहले निधन हो चुका है। जबकि रामस्वरूप की प|ी करीब 8 साल पहले उसे छोड़कर चले गई। फिलहाल रामस्वरूप रैन बसेरे में रहता है।
ऐसे पता चला जिंदा होने का सच : सामान्य अस्पताल में गांव झाड़ोली का शीशराम जाटव नाम का व्यक्ति भर्ती था। घटना के दूसरे दिन शीशराम के बेटे शेखर को रामस्वरूप अस्पताल के बाहर मिल गया। इस दौरान दोनों के बीच बातचीत हुई। इसके बाद रामस्वरूप अस्पताल में भर्ती शीशराम से मिलने पहुंच गया। उसे देखकर देखकर शीशराम ने रामस्वरूप से बोला कि तेरी तो मौत हो चुकी है और दाहसंस्कार भी कर दिया। तूं जिंदा कैसे घूम रहा है।
रामस्वरूप जाटव
अलवर. गांव झाड़ोली में रामस्वरूप जाटव का घर, जिस पर ताला लटका हुआ है।
रामस्वरूप बोला-साहब मैं तो जिंदा हूं...
घटना का पता लगने पर दैनिक भास्कर प्रतिनिधि रामस्वरूप जाटव के घर गांव झाड़ोली पहुंचा। लेकिन यहां उसके घर पर ताला लगा मिला। ग्रामीणों से पूछताछ पर पता चला कि रामस्वरूप गांव में कभी-कभी आता है। वह अलवर के खदाना मोहल्ला स्थित अस्थाई रैन बसेरे रहकर जीवन यापन करता है। जबकि उसका छोटा भाई मनीष उसकी बहन के घर गया हुआ है। भास्कर प्रतिनिधि रामस्वरूप की तलाश के लिए रैन बसेरा पहुंचा। यहां एक व्यक्ति रेन बसेरे के गेट पर खड़ा मिला। जिससे रामस्वरूप के बारे पूछा तो उसने बताया कि वहीं रामस्वरूप है। जब उससे पूछा कि रामस्वरूप की मौत हुए तो कई दिन हो चुके है। इस पर उसने तपाक से जवाब दिया कि साहब मैं तो जिंदा हूं... और ग्रामीणों मुझे समझकर अज्ञात व्यक्ति का दाहसंस्कार दिया। रामस्वरूप का कहना था कि ग्रामीणों ने उसके कपड़े-लत्ते सहित ईंधन जला दिया।