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कोली का जवाब- सर्वे करा लें किसके पास ज्यादा प्रॉपर्टी है, मैंने तो खरीदा है

3 वर्ष पहले
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रमेश खींची: मुझे व्यक्तिगत किसी पर आरोप नहीं लगाने चाहिए लेकिन जनता को पता है चार साल में विधायक जी ने क्या किया है? आप जनता से पूछ ले, अध्यापक के तबादले के एक-एक लाख रुपए लिए जाते हैं। थानेदार, तहसीलदार,एसडीएम से मंथली। कोई छोड़ा ही नहीं। पूरा सिस्टम कोलेप्स हो चुका है। विधायक का क्या कर्तव्य होता है और क्या दायित्व होना चाहिए,कहीं कुछ नहीं है। इनका एक मात्र ध्येय रहा पैसा कमाना।

-मंगलराम कोली: इनका काम ही आरोप लगाना होता है। विरोधी तो आरोप लगाते ही है। इन्होंने अपने कार्यकाल में क्या है? यह जनता को पता है। चार साल में मैने क्या किया? ये किससे तुलना करना चाह रहे है। मेरे कार्यकाल में विधानसभा क्षेत्र में 100 करोड़ की एनसीआर पीबी तहत सड़कों का निर्माण हो रहा है। 20 साल में इतना काम नहीं हुआ जो अब हो रहा है। 47 गौरव पथ का काम चल रहा है। इनमें 40 का काम पूरा हो चुका है। हनुमान बाग से नांगल धौलागढ़ की 15 किलोमीटर तक की सड़क का निर्माण हमने कराया है।

रमेश खींची: आपको जो भत्ता मिलता है वह खर्च करने के लिए मिलता है। क्षेत्र में आप चार साल आए ही नहीं तो खर्च कहां करेंगे। जो एमएलए लैंड का पैसा मिलता है उसे भी 10 प्रतिशत कमीशन लेकर देते है। ये जनता का पैसा है। जीवन में एक रुपए का मुझे कोई दागी बता दे।

-मंगलराम कोली:पहले अपनी गिरेबान भी देख लें। कठूमर से प्रधान इनका बेटा संजय खींची है। दूसरे पर आरोप लगाने से पहले स्वयं पर देख लें। किसी से पूछ लो कि कमीशन कौन लेता है। इसकी जांच करा लें कि कौन कमीशन लेता हैं।

रमेश खींची: मैं पूछना चाहता हूं विधायक कौनसा बिजनेस करते हैं। कौनसा कृषि का काम है। क्या रिटर्न भरते हैं। तुरंत इतनी इतनी रकम जोड़ ली कि कानोता के पास करोड़ों रुपए का फार्म हाउस बना लिया। कहां से आ गया इतना पैसा।

-मंगलराम कोली: कोई फार्म हाउस नहीं है। दो प्लाट है। मैने 1998 में ये दो प्लाट लिए थे। उस समय 80 रुपए वर्ग गज के हिसाब से लिए। मेरा तो उनसे कोई विरोध नहीं है लेकिन जब मुझ पर आरोप लगा रहे है तो पूछना चाहता हूं ये सारी प्रॉपर्टीज झगडे की लेते है। उनके पास ज्यादा प्रॉपर्टीज है या मेरे पास। इसका सर्वे कराओ।

मंगलराम कोली

मंगलराम कोली: वर्तमान में कठूमर विधानसभा से भाजपा के विधायक है। वे दूसरी बार विधायक चुने गए है। इससे पहले 1993 में पहली बार निर्दलीय विधायक चुने गए थे। उस समय 1993 से 98 तक भैरोंसिंह शेखावत सरकार में मंत्री रहेे।

रमेश खींची

रमेश खींची: वर्तमान में प्रदेश कांग्रेस कमेटी में सदस्य है। कठूमर से लगातार दो बार विधायक रहे है। पहली बार 1998 से 2003 तक तथा दूसरी बार 2003 से 2008 तक विधायक रहे। वे 1995 से 98 तक कठूमर पंचायत समिति के प्रधान रहे।

कोली ने पूछा-आपका बेटा प्रधान है, कमीशन कौन लेता है

खींची का जवाब : मुझे कोई दागी तो बता दे, आप 10% कमीशन लेकर काम देते हैं

रमेश खींची: इन्होंने तो कभी मुख्यमंत्री के सामने क्षेत्र की जनता की बात ही नहीं रखी। हमारे सब डिवीजन में कॉलेज होना चाहिए वो नहीं मिला। हायर एज्युकेशन के लिए 70 किलोमीटर भरतपुर और 80 किलोमीटर अलवर आना पड़ता है। प्राइवेट सेक्टर में जो कॉलेज है उनकी हालत पता ही है। गरीब आदमी कहां से फीस दे पाएगा। कोई स्कूल क्रमोन्नत नहीं हुए। क्षेत्र के लिए चार साल में कुछ नहीं किया।

-मंगलराम कोली: आपका कार्यकाल तो 60 साल का रहा था। कांग्रेस ने क्या किया ? मैने अपने कार्यकाल में 32 सीनियर सैकंडरी स्कूल खुलवाए हैं। ये मेरे चार-सवा चार साल के कार्यकाल में खुली है। आपने कितनी खुलवाई थी। कॉलेज की बात है आप भी नहीं करा पाए। कॉलेज की बात चल रही है। प्रपोजल बनवा कर भिजवा रखा है। कॉलेज के लिए प्रयास जारी है।

रमेश खींची: हमारे कांग्रेस शासन के समय चंबल के पानी को लाने के लिए सर्वे हो चुका था। आज 68 गांव खारे पानी से प्रभावित है। लोग पानी के लिए तरस रहे है। हम टैंकरों की व्यवस्था कराते थे। जहां स्रोत मिलते थे वहां हैंडपंप लगाते थे। इनके राज में काम नाम की कोई चीज नहीं है।

-मंगलराम कोली: इनके कार्यकाल में चंबल का पानी लाने के लिए कुछ नहीं हुआ। पानी लाने के लिए हमारी सरकार काम रही है। उनके फर्जी आंकड़े थे। खारे पानी की समस्या से जूझ रहे 75 गांवों में आरओ स्वीकृत कराए है। मीठे पानी के लिए इनमें करीब 20 गांवों में आरओ लग चुके है। एक आरओ की कीमत 33 लाख रुपए। आपने का एक भी आरओ लगाया हो तो बता दो। क्षेत्र में सैकडों हैंडपंप लगाए है। पानी पर पूरी योजना से काम चल रहा है।

रमेश खींची: सिंचाई का सिस्टम बिगड़ा पड़ा है। डार्क जोन के नाम पर बोरिंग नहीं कर सकते। किसानों के खिलाफ मुकदमे बनाए जा रहे हैं। आखिर किसान कहां जाए। पानी है नहीं फसल कैसे करे। नहरों पानी कैसे लाया जाए। इस पर उन्हें सरकार से बात करनी चाहिए।

-मंगलराम कोली: मै इनसे पूछना चाहता हूं कि इन्होंने साठ साल में क्या किया। जहां भी डार्क जोन हैं वहां बोरिंग पर रोक का पूरे जिले में नियम है। ऐसी कोई बात नहीं है। गहरे बोरिंग पर उनकी सरकार में भी रोक थी और हमारी में भी है। किसान तो इनके कार्यकाल में परेशान रहा है।

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